पुलिस की गिरफ्त में आरोपी (लाल शर्ट में)
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आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज से फरार हुआ हत्या का आरोपी बंदी मनोज रविवार को पुलिस टीम के हत्थे चढ़ गया। वो पत्नी से मिलने के लिए भागा था। मगर, घर पर ताला लगा होने के कारण पत्नी से नहीं मिल सका। इसके बाद भरतपुर और मथुरा चला गया। रेलवे स्टेशन पर रात गुजारीं। भरतपुर से रविवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया।
गांव मुड़ियापुरा (अभैदौपुरा) निवासी मनोज पुत्र टीकम को 26 अक्तूबर को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। उस पर डेढ़ माह की बेटी अंशू को जमीन पर पटककर जान से मारने का आरोप है।
आरोपी को 28 जनवरी को एसएन मेडिकल कॉलेज की आठ मंजिला बिल्डिंग में भर्ती कराया गया था। बंदी को देखने के लिए पुलिस लाइन के दो सिपाही ड्यूटी पर थे। 30 जनवरी को मनोज भाग गया था। रविवार को उसको भरतपुर से गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने बताया कि जेल जाने के बाद पत्नी माया मुलाकात करने नहीं आई। जब उसे एसएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया, तब पत्नी से मिलने जाने के बारे में सोचा।
घटना वाले दिन पुलिसकर्मियों ने खाना खाने के लिए उसकी रस्सी खोल दी। इसके बाद बातचीत में लग गए। तभी वो बाहर आ गया। एसएन में ही एक संस्था का भोजन किया। यहां भी पुलिस को न देखकर भाग गया।
सबसे पहले रात में अछनेरा अपने घर पहुंचा। मगर, घर पर कोई नहीं था। पत्नी माया कहीं नजर नहीं आई। इस पर वापस चला गया। रेलवे स्टेशन जाकर रात गुजारी। अगले दिन भरतपुर आ गया।
यहां पर अपने मामा के घर गया, लेकिन कुछ देर बाद ही वापस चल दिया। यहां से मथुरा चला गया। रेलवे स्टेशन पर रात गुजारी। उसके पास रुपये भी नहीं थे। इस कारण बिना टिकट ही यात्रा की। शनिवार को फिर से भरतपुर आ गया। इसकी भनक पुलिस का लग गई। उसे पकड़ लिया गया।
यह था मामला
गांव मुड़ियापुरा (अभैदौपुरा) निवासी मनोज की पहली पत्नी की मौत हो गई थी। उसने मार्च 2019 में बिहार की माया से दूसरी शादी की थी। माया के पहले पति की मौत हो गई थी। उसके डेढ़ माह की बेटी अंशू थी। माया बच्ची को अपने साथ ले आई थी। वो बेटी पर अधिक ध्यान देती थी।
यह बात मनोज को बुरी लगती थी। आरोप था कि अंशू के रोने पर मनोज ने उसे जमीन पर पटक दिया था, जिससे उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने गुपचुप शमशान घाट ले जाकर बच्ची के शव को जमीन में गाढ़ दिया था। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मनोज, उसके पिता और मां सहित तीन रिश्तेदारों को गिरफ्तार किया था।