इंस्पेक्टर कोतवाली अरविंद कुमार ने बताया कि कोतवाली में मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही आरोपी शिक्षक फरार चल रहा था। बताया कि सोमवार की सुबह सूचना मिली कि बर्खास्त वीरेंद्र जेल तिराहा के पास कहीं जाने की फिराक में है। इस पर टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। थाने लाकर पूछताछ की गई तो उसने अपना नाम पता बताया। आरोपी को पूछताछ करने के बाद न्यायालय में पेश किया गया।
आरोपी ने सगे भाई को भी धोखे में रखा
आरोपी वीरेंद्र सिंह पढ़ा लिखा है, लेकिन उसके शातिर दिमाग ने गलत रास्ता चुना। उसने अपने सगे भाई को धोखे में रखकर अपने नाम पते व फोटो से आधार कार्ड बनवा लिया। इतना ही नहीं वर्ष 2004 में भाई की डिग्री व अंकपत्र पर डायट भोगांव से सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति भी पा ली। इसके बाद घिरोर के प्राथमिक विद्यालय मडैया में तीन माह का प्रशिक्षण प्राप्त किया। पहली नियुक्ति वर्ष 2006 को प्राथमिक विद्यालय जगदीशपुर विकास खंड किशनी में हुई थी।
15 साल तक करता रहा नौकरी, प्रमोशन भी पाया
2011 तक वह नियुक्त रहने के बाद प्रमोशन पाकर सहायक अध्यापक पर जूनियर हाई स्कूल तरिहा किशनी में नियुक्त था। विभाग की आखों में धूल झोंक वह 15 साल तक नौकरी करता रहा। उसकी जालसाजी तब खुली तो जब उसके भाई धीरेंद्र का आधार कार्ड पैन कार्ड से लिंक नहीं हुआ। इस पर धीरेंद्र ने बीएसए कानपुर देहात से उसकी शिकायत की। इसके बाद जांच की प्रक्रिया शुरू हुई। जुलाई 2020 को वीरेंद्र का बर्खास्त करने के साथ ही उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था।