पुलिस ने बताया कि उसका इलाज भाई लखनऊ में कराता था। इसलिए वह सीधा वहीं पहुंच गया। पुलिस ने उसके इलाज का पर्चा जारी किया है, वह दिसंबर 2003 का है। वहीं पुलिस के अनुसार उसका शस्त्र लाइसेंस 2021 में जारी किया गया है। सवाल उठता है कि जब उसका इतने लंबे समय से मनोरोग का इलाज चल रहा था तो शस्त्र लाइसेंस कैसे बन गया? इस संबंध में पुलिस आयुक्त दीपक कुमार का कहना है कि आरोपी के शस्त्र लाइसेंस के निरस्तीकरण के संबंध में अपनी रिपोर्ट आगरा पुलिस आजमगढ़ भेजेगी।
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