कैला मैया की जात करने को करौली जाने वाले पदयात्रियों का उत्साह चरम पर है। आसमान से बरसती ‘आग’ भी आस्था को डिगा नहीं पा रही है। पदयात्रियों में विकलांग, बच्चे, महिलाएं, किशोरियां भी शामिल हैं। पदयात्रियों की सेवा के लिए रास्तों में भंडारे, शर्बत और पानी के स्टाल लगे हुए हैं।
नवरात्र पर करौली स्थित कैला देवी के मंदिर पर जात करने के लिए आगरा और आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पैदल रवाना होते हैं। शहर से होकर जाने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए स्टाल का सिलसिला डायट कार्यालय के बाहर से ही शुरू हो जाता है। फीरोजाबाद से आए मुनेंद्र विकलांग हैं, वे ट्राइ साइकिल पर पिछले छह साल से कैला देवी की जात करने जाते हैं। इसी तरह माईथान से हर साल रवि भगत भी माता की झांकी के साथ करौली मैया के दर्शन को जाते हैं। इसी तरह गांधी नगर, फीरोजाबाद के दीपू, बोदला के मनीष, जगदीशपुरा के राजू, मनीषा, सीमा देवी समेत तमाम श्रद्धालु जोश से भरे हुए हैं।