राम गोपाल एवं अर्चना श्रीवास्तव
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घर से बेघर कर दिए गए बुजुर्ग जब नए साल में फिर घर पहुंचे, तो उनकी आंखों से आंसू छलक आए। किसी का बेटा अपनी गलती का एहसास कर अपने पिता को घर ले गया, तो किसी बेटे को नए साल से पहले मां की याद ने इतना सताया कि बेटा उन्हें लेने आश्रम पहुंच गया। एक हफ्ते में रामलाल वृद्धाश्रम से सात बुजुर्गों की घर वापसी हो चुकी है। आश्रम में रहने वाली मनिया ने घर लौटते समय रुंधे गले से कहा कि पुराना साल उन्हें दर्द देकर गया था। नए साल में वो खोई हुई खुशियां फिर लौट आईं। आश्रम के अध्यक्ष शिव प्रसाद शर्मा ने बताया कि नए साल में उन बुजुर्गों को भी घर की काफी याद आई, जो आश्रम में रह रहे हैँ। इन बुजुर्गों के साथ आश्रम में नया साल मनाया गया। भजन संध्या में कई बुजुर्गों ने नृत्य भी किया। आश्रम में रह रहीं सुनीता देवी का कहना था कि मुझे उम्मीद है कि जिस तरह बुजुर्गों के परिजन उन्हें वापस ले गए, उसी तरह एक दिन उनका बेटा भी उन्हें लेने आएगा।
आज मैं बहुत खुश हूं : अर्चना
नए साल से पहले घर जा रही हूं। इसलिए मैं काफी खुश हूं। यह कहना था अर्चना श्रीवास्तव का। अर्चना घर जाते समय काफी भावुक हो गईं। उनके बेटी और दामाद उन्हें लेने आश्रम पहुंचे थे। घर जाते समय अर्चना काफी भावुक हो गईं। आश्रम में रह रही अपनी साथियों के साथ गले मिलकर उन्होंने घर के लिए आश्रम से विदाई ली।
नया साल खास हो गया : राम गोपाल
आश्रम में रह रहे राम गोपाल दास को उनके परिजन टौंक, राजस्थान से लेने के लिए पहुंचे। नए साल से पहले आश्रम में परिजनों को देख उन्हें पहले विश्वास नहीं हुआ। इसके बाद आश्रम के सेवकों ने उन्हें बताया कि आज वह घर जा रहे हैं। राम गोपाल का कहना था कि नया साल उनके लिए खास हो गया है। उम्र के इस पड़ाव पर मुझे अपनों की जरूरत थी।
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