आगरा। श्रीपारस हॉस्पिटल कांड में लीपापोती से पीड़ितों में रोष है। मॉकड्रिल के बाद दम तोड़ने वाले मरीजों के परिजनों की फरियाद अनसुनी हो गई है। पीड़ितों ने जिला प्रशासन, थाना पुलिस के बाद अब आईएमए जांच कमेटी की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं।
सात जून को श्रीपारस हॉस्पिटल संचालक डॉ. अरिन्जय जैन के वीडियो वायरल हुए। जिनमें ऑक्सीजन की मॉकड्रिल का खुलासा हुआ। रविवार को इस कांड को 55 दिन हो गए। जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट पहले से कठघरे में खड़ी है, इधर थाना पुलिस ने भी आरोपितों के विरुद्ध लचर रवैया बरता। 26 अप्रैल को ऑक्सीजन कमी से 22 मौतों के आरोपों की जांच में 16 मृतकों की पुष्टि हो चुकी है। परंतु प्रशासन ने किसी की मौत ऑक्सीजन कमी से नहीं मानी। जबकि पीड़ितों का कहना है कि उनकी स्वजनों की मौत ऑक्सीजन नहीं मिलने से हुई। देहतोरा निवासी प्रियंका सिंह का आरोप है कि शासन-प्रशासन के साथ पुलिस और आईएमए की मिलीभगत से जांच के नाम पर लीपोपाती की गई। हमें इंसाफ नहीं मिला।
इटावा निवासी राजू सिंह का कहना है कि अब प्रशासन, पुलिस और सरकार से भरोसा उठ चुका है। अब सिर्फ ऊपर वाले पर भरोसा है। उसकी लाठी में आवाज नहीं होती। हमारे साथ प्रशासन, पुलिस और आईएमए ने इंसाफ नहीं किया, लेकिन ईश्वर इंसाफ जरूर करेगा। पीड़ितों ने प्रशासन पर मौतों का गलत आंकड़ा जारी करने और संचालक को बचाने के आरोप लगाए हैं। इस मामले में 10 पीड़ितों ने जिलाधिकारी को जांच के लिए प्रार्थनापत्र दिए थे। जिन्हें प्रशासनिक जांच में अहमियत नहीं मिली। प्रशासन का कहना है कि सभी पीड़ितों के प्रार्थनापत्र आगे की कार्रवाई के लिए थाना पुलिस को भेजे गए हैं।