पक्के घरों ने छीना आवास, कीटनाशक ने जिंदगी
दुनिया के 50 देशों में गौरैया के अस्तित्व पर संकट की कई वजह रहीं हैं। रेंजर उदय प्रताप सिंह ने बताया कि कच्चे घरों पर पड़ने वाले छप्पर में गौरैया घोंसले बनाती थी। अब पक्के मकान बन गए, गौरैया के घोंसले छिन गए। फसलों में कीटनाशकों के अंधाधुंध छिड़काव, मोबाइल टावरों के रेडिएशन ने भी गौरैया के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला। अस्तित्व का संकट पैदा हो गया था।
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आई लव स्पैरो... के बिना जीवन संगीत अधूरा
हर साल 20 मार्च को विश्व गौरैया दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को इस प्यारी चिड़िया की घटती संख्या के बारे में जागरूक किया जा सके। इसे बचाने के लिए प्रेरित किया जाए। इस साल की थीम 'आई लव स्पैरो' का जिक्र कर बाह के साहित्यकार डॉ. शिवशंकर कटारे ने बताया कि हमारे घर-आंगन में फुदकने वाली गौरैया के बिना हमारा जीवन संगीत अधूरा है। गौरैया के प्रति लगाव और संरक्षण को बढ़ावा मिलना चाहिए।
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सामाजिक वानिकी रेंजों में भी प्रयास
गौरैया को बचाने के लिए बाह, पिनाहट, जैतपुर की सामाजिक वानिकी रेंज में भी जागरूकता के प्रयास रंग लाए। बीहड़ में पौधरोपण से भी गौरैया को घोंसले के लिए नए ठिकाने मिले। जैतपुर के रेंजर कोमल सिंह, बाह के रेंजर अमित कुमार ने बताया कि पौधे लगाने और घोंसले वितरित कर लोगों को जागरूक करने से बीहड़ से गांवों तक गौरैया दिखने लगी हैं।