अभिभावकों का कहना है कि मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते उपयोग ने बच्चों का पढ़ाई, खेलकूद और परिवार के साथ बिताया जाने वाला समय काफी कम कर दिया है। कई बच्चे घंटों रील और गेम में व्यस्त रहते हैं, जिससे उनकी एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। साथ ही स्कूलों में भी डिजिटल साक्षरता और साइबर सुरक्षा को लेकर नियमित जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाने की मांग की है।
ये भी पढ़ें - जनकपुरी महोत्सव 2026: नेपाल में जैसा है जनक महल, वैसा ही आगरा में सजेगा; मिथिला संस्कृति की दिखेगी भव्य झलक
अग्रसेनपुरम निवासी गृहिणी श्वेता यादव ने बताया कि आज बच्चे किताबों से ज्यादा मोबाइल से जुड़े हुए हैं। सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक लगने से वे पढ़ाई और खेलकूद पर अधिक ध्यान देंगे। भारत को भी इस दिशा में कदम उठाना चाहिए।
ये भी पढ़ें - UP: कर्जदारों से बचने के लिए दांव पर लगा दी 10 वर्षीय बेटी, कारोबारी ने की ऐसी हरकत; पुलिस भी रह गई सन्न
जयपुर हाउस निवासी विकास गोयल का कहना है कि सोशल मीडिया पर बच्चों के सामने कई तरह की अनुचित सामग्री आ जाती है। कम उम्र में इसका असर उनके व्यवहार और सोच पर पड़ता है। ऐसे में सरकार को कड़े कदम उठाने की जरूरत है।
ये भी पढ़ें - डीएसएस पिटाई प्रकरण: डीआरएम कार्यालय पर छह घंटे हंगामा, हाथापाई और धक्का-मुक्की; मची रही अफरा-तफरी
दयालबाग की रहने वाली अभिभावक विनीता शर्मा ने बताया कि बच्चों को तकनीक से दूर नहीं किया जा सकता, लेकिन उसकी एक उम्र तय होनी चाहिए। 16 साल से पहले सोशल मीडिया की बजाय पढ़ाई, खेल और रचनात्मक गतिविधियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
ये भी पढ़ें - UP: तीन दिन से तलाश, बंद मोबाइल और फिर नाले में मिला शव; सुरक्षाकर्मी की मौत बनी पहेली
बल्केश्वर निवासी मनोज शर्मा ने कहा कि अगर सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्ती होगी तो बच्चे फर्जी उम्र बताकर अकाउंट नहीं बना पाएंगे। इससे साइबर बुलिंग और ऑनलाइन लत जैसी समस्याओं पर भी काफी हद तक रोक लग सकेगी।
ये भी पढ़ें - अच्छी खबर: भूमि विवादों पर प्रशासन सख्त, अब प्रतिदिन होगी सुनवाई; पुलिस के साथ होगा निस्तारण