पंचकल्याणक महोत्सव: शौरीपुर से बाह तक निकली भगवान नेमिनाथ की बारात, झूमे , नाचे श्रद्धालु, यमुना क?
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बाह। पंचकल्याणक महोत्सव में बुधवार को शौरीपुर से बाह तक भगवान नेमिनाथ की बरात निकाली गई। बरात में भगवान नेमिनाथ के चचेरे भाई कृष्ण और बलदाऊ भी रथों में सवार थे। इस दौरान श्रद्धालु झूमते-नाचते दिखे। प्रवचन में मुनिराज विहसंत सागर ने लोगों से शाकाहार अपनाने की सीख दी। कहा कि इससे पशुधन बचेगा, गायों की रक्षा होगी।
बाह में प्राचीन पार्श्वनाथ भगवान के मंदिर के जीर्णोद्धार के उपलक्ष्य में आयोजित पंचकल्याणक महोत्सव के तीसरे दिन भगवान नेमिनाथ की बरात का आयोजन हुआ। चार बैंड बाजों और 12 रथों के साथ निकली बरात का जगह जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। और आरती कर स्वागत किया गया। समापन पर उत्सव का आयोजन हुआ।
मुनिराज विहसंत सागर ने कहा कि पशुओं के वध की छोटी सी घटना को देखकर भगवान नेमिनाथ ने वैराग्य अपना लिया था। लोगों से सात्विक और शाकाहार अपनाने का आह्वान किया। इस दौरान विधायक पक्षालिका सिंह, गाजियाबाद के जैन समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष जम्मू प्रसाद जैन, चेयरमैन सुनील बाबू का आयोजन समिति ने सम्मानित किया।
महोत्सव में भगवान नेमिनाथ के तप कल्याणक का मंचन किया गया। इसमें बरात निकलने , पशु वध का क्रंदन देखने और दूल्हे का चोला उतारकर वैराग्य के लिए गिरनार पर्वत की ओर जाने और दूल्हे के वैरागी होने की सूचना पर जूनागढ़ की राजकुमारी राजुल के गिरनार पहुंचने और साध्वी का जीवन जीने का संकल्प लेना दर्शाया गया।
महोत्सव में देश के विभिन्न हिस्सों से लाई गई 81 प्रतिमाओं का आचार्य अजीत शास्त्री ने संस्कार कराया। प्रतिमाओं की सजावट, सौंदर्य को उतारा गया। उसके बाद दीक्षा संस्कार किया गया।