फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

युवती से दुष्कर्म का मामला: अनाथालय सील, बच्चों को किया गया शिफ्ट, प्रबंध समिति पर मुकदमा

Mon, 07 Oct 2019 02:40 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
इसी अनाथालय में हुई थी घटना - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
आगरा में तीन अक्तूबर को अंत:वासी युवती से दुष्कर्म का मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने रविवार को यमुनापार के श्रीमद्दयानंद अनाथालय को सील कर दिया। जांच में कई और अनियमितताएं उजागर हुईं। अनाथालय बगैर पंजीकरण के चल रहा था। यहां बच्चों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार हो रहा था। वयस्क भी रह रहे थे। 
विज्ञापन


इस पर अध्यक्ष मान सिंह परमार को नामजद करते हुए प्रबंध समिति के सभी सदस्यों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। यहां के बच्चों को शाहगंज स्थित बाल सुधार गृह, किशोरी और युवतियों को आशा ज्योति केंद्र भेजा गया है। अवैध रूप से रह रहे सात युवक भी निकाले गए।

सीडीओ जे रीभा, एत्मादपुर की एसडीएम ज्योति राय, डीपीओ लव कुश भार्गव ने रविवार दोपहर को अनाथालय का निरीक्षण किया। दस्तावेजों की पड़ताल और वहां रह रहे बच्चों, युवक-युवतियों से पूछताछ की। प्रबंध समिति के अधिकारी जुवेनाइल एक्ट के तहत पंजीकरण के कागजात नहीं दिखा पाए।
विज्ञापन
विज्ञापन

बिना पंजीकरण के चल रहा था अनाथालय

अनाथालय में सील लगाता पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
सीडीओ ने बताया कि पंजीकरण न होने के कारण अनाथालय पर शाम को सील लगवा दी गई। एत्माद्दौला थाना के इंस्पेक्टर उदयवीर सिंह मलिक  ने बताया कि जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। 

इसमें बगैर पंजीकरण अनाथालय चलाने और बच्चों के साथ उपेक्षापूर्ण व्यवहार करने की धाराएं लगाई गई हैं। आश्रम में 29 बालक, 11 बालिकाएं, चार विवाहिताएं रह रहीं थी। इन्हें शिफ्ट किया गया। अनाथालय की युवती ने तीन युवकों पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। 

अवैध रूप से रह रहे थे सात युवक 

सात युवक अवैध रूप से रहते मिले। इन्हें अनाथालय छोड़कर जाने का फरमान सुनाया गया। ये सभी टेंपो में सामान लादकर ले गए। इनमें से एक के पास मोबाइल फोन भी था। अनाथालय की युवतियों से मोबाइल पहले ही बरामद किए जा चुके हैं।

शादीशुदा लोग रात को ठहरते थे

युवक-युवतियों ने बताया कि अनाथालय में बाहर के लोग भी आकर ठहरते थे। ये रात को आतेे थे। इनमें ज्यादातर शादीशुदा होते थे। अनाथालय का प्रबंधक कहता था कि ये यहां रह रहे बच्चों की माता-पिता हैं। रजिस्टर में इनका ब्योरा नहीं मिला।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें