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अपने ही जिले के पुस्तकालय में अनजान शख्सियत हैं पंडित दीनदयाल उपाध्याय

Fri, 22 Sep 2017 07:37 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला मथुरा
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय - फोटो : File Photo
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देश के महापुरुषों में शुमार पंडित दीनदयाल उपाध्याय मथुरा के ‌ही राजकीय पुस्तकालय में एक अनजान शख्सियत की तरह हैं। यहां 70 हजार किताबों के खजाने में महज दो ही किताबें पंडित जी से संदर्भित हैं। 
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बता दें कि पंडित दीनदयाल का अंत्योदय दर्शन आज भारत की राजनीति को दिशा दे रहा है। मोदी सरकार उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प ले रही है, सरकार की नीतियों में पंडित जी के राजनीतिक, सामाजिक और अंत्योदय दर्शन को शुमार किया जा रहा है। नई पीढ़ी पंडित जी को पढ़ना और जानना चाहती है लेकिन राजकीय पुस्तकालय में पंडित से जुड़ा साहित्य ही उपलब्ध नहीं है। 

यहां महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, रविंद्र नाथ टैगोर सहित देश के महापुरुषों के जीवन दर्शन से जुड़ी सैकड़ों किताबें भरी हैं। लेकिन पंडित दीनदयाल उपाध्याय के बारे में बताने के लिए महज दो पुस्तकें ही है। दिलचस्प बात ये है मथुरा पंडित जी का ग्रह जनपद होने का गौरव भी रखता है। 
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आजादी के बाद पहली बार होगी गोष्ठी

पंडित दीनदयाल उपाध्याय को लेकर शनिवार दोपहर एक बजे राजकीय पुस्तकालय डेंपियर नगर में एक गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इसमें उनके जीवन दर्शन को जानने, समझने वाले वक्ताओं को बुलाया गया है। मजेदार बात ये है आजादी के बाद पहली बार पुस्तकालय में पंडित के जीवन दर्शन पर गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। 

राजकीय पुस्तकालय मथुरा के अध्यक्ष डॉ. श्याम सुंदर ने बताया कि पाठक पंडित जी के जीवन से जुड़ी पुस्तकों को मांगते है। लेकिन पुस्तकों की खरीद फरोख्त का काम लखनऊ स्तर से होता है। पहली बार पंडित जी के जीवन दर्शन पर एक गोष्ठी हो रही है। पाठकों की रुचि के बारे में लखनऊ को भी अवगत कराया जाएगा। 
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