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खानापूर्ति: एक सिपाही के हवाले बाल मित्र पुलिस थाना, प्रचार-प्रसार के अभाव में बना शोपीस

Sun, 09 Feb 2020 12:42 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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बाल मित्र पुलिस थाना - फोटो : अमर उजाला
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नशाखोरी, भिक्षावृत्ति और अपराध में लिप्त बच्चों की काउंसिलिंग कर जीवन संवारने के लिए बाल मित्र पुलिस थाना खोला गया, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह सिर्फ खानापूर्ति ही बनकर रह गया। आलम यह है कि पिछले चार साल में 10 बच्चे ही काउंसिलिंग के लिए लाए गए। थाना को संभालने के लिए एक महिला सिपाही की ड्यूटी जरूर लगती है। वो भी बच्चों के लाए जाने पर ही आती हैं।
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आगरा जिले में बाल मित्र पुलिस थाना 10 साल पहले खोला गया था। यह पर्यटन थाना परिसर में बने एक कमरे में चार साल से चल रहा है। इसमें एक सिपाही की ड्यूटी लगती है। थाना परिसर की दीवारों पर बच्चों के पोस्टर लगाए गए हैं। पुलिस अधिकारियों से लेकर बाल कल्याण अधिकारी, वीमेन पावर लाइन, आशा ज्योति केंद्र और चाइल्ड लाइन तक के नंबर लिखे हैं।

थाना के अंदर कमरे की सजावट इस तरह से की गई कि यहां लाए जाने वाले बच्चों को अच्छा माहौल का अहसास हो। वो अपना घर समझें। उनके खेलकूद का सामान भी रखा गया। नशा करने वाले, भिक्षावृत्ति और किसी तरह के छोटे अपराध में लिप्त बच्चों को लाने पर यहां कांउसिलिंग की व्यवस्था की गई थी। 
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पुलिस के मुताबिक, बच्चों के लिए कार्य करने वाले एनजीओ के पदाधिकारियों को बुलाया जाता है। वो बच्चों से पूछताछ करते हैं। पुलिसकर्मी भी वर्दी में नहीं होते हैं। इसके बाद अभिभावकों को बुलाकर बच्चों की शिक्षा पर जोर देते हैं। बच्चे भी काउंसलर्स की बात को समझते हैं।
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रजिस्टर में सिर्फ 10 बच्चों के नाम

बाल मित्र थाना में महिला सिपाही भी कभी कभार ही आती हैं। इस कारण हर समय ताला ही लगा रहता है। जब कोई बच्चा लाया जाता है, तो सिपाही को बुला लिया जाता है। सूत्रों के मुताबिक, पिछले चार साल में थाना में दस बच्चे ही लाए गए, जिनकी काउंसिलिंग का रिकार्ड भी रजिस्टर में अंकित है।

पर्यटन थाना निरीक्षक दिनेश कुमार ने बताया कि बाल मित्र थाना में सिपाही की ड्यूटी लगाई जाती है। जरूरत पड़ने पर एक दरोगा भी आते हैं। बच्चों की काउंसिलिंग की जाती है। 

महफूज संस्था के समन्वयक नरेश पारस ने कहा कि बाल मित्र पुलिस थाना सिर्फ खानापूर्ति मात्र बनकर रह गया है। सिटी से बाहर होने के कारण लोगों को थाने की जानकारी नहीं है। इसमें पुलिस भी बच्चों को लेकर नहीं जाती है।

चाइल्ड लाइन की समन्वयक ऋतु वर्मा ने कहा कि बाल मित्र पुलिस थाना का प्रचार प्रसार किया जाना चाहिए। इससे लोग थाना में बच्चों  से संबंधित शिकायत लेकर पहुंचेंगे।
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