ये है मानक
0-50 एक्यूआई तक अच्छा
51-100 एक्यूआई तक संतोषजनक
101-200 एक्यूआई तक मॉडरेट
201-300 एक्यूआई तक खराब
301-400 एक्यूआई बहुत खराब
401 से ज्यादा एक्यूआई गंभीर
हवा में धूल और सूक्ष्म कण ज्यादा
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय डॉ. विश्वनाथ शर्मा ने बताया कि ताजनगरी की हवा में धूल और सूक्ष्म कणों की संख्या ज्यादा है। सड़क किनारे की धूल, ट्रैफिक और ईंधन उत्सर्जन के कारण प्रदूषण है। इसे कम करने के लिए आईआईटी कानपुर से अध्ययन कराया गया था, जिसकी सिफारिशें आ चुकी हैं।
अनियंत्रित यातायात की है समस्या
टीटीजेड अथॉरिटी के सदस्य इंजीनियर उमेश शर्मा ने कहा कि निर्माण कार्य, वाहनों से उड़ती धूल, सड़क किनारे कच्चे फुटपाथ से शहर में प्रदूषण ज्यादा है। यहां औद्योगिक नहीं, बल्कि यातायात नियंत्रित न होने से प्रदूषण है। यही वजह है कि बारिश होते ही आगरा देश के सबसे अच्छी हवा वाले तो धूल बढ़ने पर देश के सबसे खराब हवा वाले शहर में शामिल हो जाता है।
धूल कणों, हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए ये समाधान
- सड़कों पर वैक्यूम स्वीपिंग के साथ पानी का छिड़काव किया जाए
- मशीनों से डिवाइडर किनारे जमा धूल को एकत्र किया जाय
- फुटपाथ, साइड पटरी पर इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाई जाएं
- सड़क किनारे पौधे लगाए जाएं और कच्ची जगहों पर घास लगाएं
- लकड़ी, कोयले को ईंधन के रूप में न जलाएं, एलपीजी कनेक्शन दें
- ठोस कचरे का निस्तारण कराएं, डलाबघरों में कूड़ा जलाने से रोकें
- भवन निर्माण सामग्री को ढककर रखें और पानी का छिड़काव करें
- भवन निर्माण स्थल पर 15 फुट ऊंची शीट से घेरकर निर्माण कराएं
- ट्रैफिक जाम से बचने के लिए सकरी सड़कों से अतिक्रमण हटाएं
- डीजल चालित वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक, सीएनजी को बढ़ावा दें
(जैसा आईआईटी कानपुर के प्रो. मुकेश शर्मा ने सुझाव दिया)
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