चश्मा बनवाने वाले 40 फीसदी लोग बढ़े
नयन ऑप्टिक के निदेशक ध्रुव जैन ने बताया कि बीते महीने में 35 से 40 फीसदी लोग चश्मा बनवाने वाले आ रहे हैं। इनमें से आधे से अधिक बच्चे शामिल हैं। इनमें ऐसे भी हैं, जो पहली बार बनवा रहे हैं, जो पहले चश्मा लगाते थे, उनका नंबर बढ़ गया है। 10 से 15 फीसदी वह हैं जिन्होंने वर्क फ्रॉम होम के दौरान इलेक्ट्रॉनिक गजट का इस्तेमाल किया।
केस स्टडी एक:
जयपुर हाउस के 10 साल की बच्ची कान्वेंट स्कूल में पढ़ती है। ऑनलाइन कक्षा लेने के साथ मोबाइल पर आए होमवर्क को भी पूरा करती थी। करीब पांच से सात घंटे मोबाइल का उपयोग करती थी। स्कूल खुलने के बाद धुंधला दिखना, सिर में दर्द रहने की परेशानी पर डॉक्टर को दिखाया, चश्मा लगावाना पड़ा।
केस स्टडी दो:
फतेहाबाद रोड कान्वेंट स्कूल में कक्षा पांच का छात्र चश्मा लगाता था। कोरोना महामारी के दौरान पढ़ाई फिर टीवी-मोबाइल पर पसंदीदा कार्यक्रम भी देखते थे। स्कूल खुलने पर बोर्ड धुंधला दिखता, बोर्ड पर लिखे अक्षर पढ़ने में भी दिक्कत होती। परेशानी होने पर परिजनों ने नेत्र रोग विशेषज्ञ को दिखाया, नंबर बढ़ा मिला।
यह बरतें सावधानी:
- मोबाइल पर 20-30 मिनट कार्य करने के बाद पांच से 10 मिनट का अंतराल लें।
- आंखों पर हथेली रखकर आराम दें। साफ और ठंडे पानी से आंखों को धोएं।
- कंप्यूटर, मोबाइल से नजर हटाकर कुछ देर तक दूर तक देखें, फिर कार्य करें।
- डॉक्टरी परामर्श पर लुब्रीकेंट आईड्रॉप का इस्तेमाल करें।
- बच्चों को लेटकर टीवी-मोबाइल नहीं देखने दें।
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