ट्रेन में गलती से पानी की जगह गलती से केमिकल पी लेने वाला सौरभ यादव 45 मिनट तक तड़पता रहा। ट्रेन में न डॉक्टर की व्यवस्था थी, न पैरामेडिकल स्टाफ की। प्राथमिकता चिकित्सा के लिए कोई दवाई तक नहीं थी। अगर उसे सिर्फ उल्टी ही करा दी गई होती तो शायद उसकी जान बच जाती।
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उसके दोस्त संतोष शर्मा का कहना है कि केमिकल का एक घू्ंट पीते ही उसके स्वाद से वह समझ गया कि गलती हो गई है। उसने तुरंत शोर मचाया, लोगों को बताया कि वह केमिकल पी गया है। वह सारी बातें बता रहा था। उसने कहा कि यह केमिकल बहुत खतरनाक है, उसे तुरंत ही उपचार की जरूरत है।
जैसे जैसे केमिकल शरीर में अंदर गया, वैसे वैसे उसका दर्द बढ़ता गया। अब वह जोर से चीख रहा था। यह देख चेन खींच दी गई। 10 मिनट में गार्ड वहां पहुंच गए। बोले, चेन किसने और क्यों खींची है।
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कैंट रेलवे स्टेशन पर मौजूद जीआरपी
- फोटो : अमर उजाला
उन्हें पूरी बात बताई। जवाब मिला, सॉरी, कुछ नहीं कर सकते। ट्रेन में उपचार की कोई व्यवस्था ही नहीं है। लोग बोले, धौलपुर पास में है, वहां ट्रेन रोक देना। गार्ड बोले, वहां भी डॉक्टर नहीं है। ऐसे करते हैं ट्रेन रास्ते में न रोककर सीधे आगरा रोकते हैं।
यह कहकर गार्ड चले गए। सौरभ चीखता रहा, तड़पता रहा। 30 मिनट चीखें थम गई। वह धीरे धीरे बोलने लगा। शरीर में हलचल कम हो गई। आगरा कैंट स्टेशन 45 मिनट बाद आया। इससे कुछ पहले ही उसकी सांसे थम गई थीं। डॉक्टर ने नब्ज देखते ही कह दिया, देर हो गई, सॉरी, डेथ हो चुकी है।
खतरनाक है पबजी, बच्चों को दूर रखें
‘विद्यार्थियों के लिए मोबाइल का अधिक प्रयोग की खतरनाक है। पबजी गेम्स के तमाम नकारात्मक परिणाम सामने आ चुके हैं। विद्यार्थियों ने आत्महत्या जैसे कदम उठाए हैं। इस तरह के खेलों को प्रतिबंधित करना चाहिए।’ - डॉ. मुकेश अग्रवाल, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक
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- फोटो : social media
‘इस खेल को प्रतिबंधित करने के संबंध में विभिन्न माध्यमों से शासन स्तर पर मांग की गई है। जो भी निर्देश मिलेंगे, उसका पालन किया जाएगा। पबजी खतरनाक खेल है, इससे छात्र-छात्राओं पर बुरा प्रभाव पड़ता है।’ - रवींद्र सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक
‘यह खतरनाक खेल है। स्कूल में इस पर सख्ती की जा रही है। अभिभावक के शिकायत करने पर विद्यार्थियों को दो दिन के लिए स्कूल से सस्पेंड कर दिया जाता है। कई अभिभावक बच्चों की शिकायत कर चुके हैं, वह देर रात तक मोबाइल पर लगे रहते हैं।’ - रामानंद चौहान, प्रधानाचार्य, सुमीत राहुल स्कूल व शहर समन्वयक, सीबीएसई
‘स्कूल में छात्र-छात्राओं को इस तरह के गेम्स से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। मोबाइल और इंटरनेट का प्रयोग बस पढ़ाई के लिए किए जाने पर जोर दिया जाता है। विद्यार्थियों की समय-समय पर काउंसलिंग भी कराई जाती है।’ - संजय तोमर, चेयरपर्सन, होली पब्लिक स्कूल व अध्यक्ष, नप्सा
साइबर अपराधी ले लेते हैं डेबिट-क्रेडिट कार्ड की जानकारी
साइबर सेल के एक्सपर्ट अमित कुमार ने बताया कि आजकल बच्चे ऑनलाइन गेम्स अधिक पसंद करते हैं। इनमें पबजी भी शामिल है। गेम्स में लेबल और उपकरण बदलने के नाम पर पेमेंट भी लिया जाता है। जोकि क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड से देना होता है।
कई बार कार्ड की जानकारी साइबर अपराधी ले लेते हैं। वह कार्ड से रकम निकाल सकते हैं। इसलिए आनलाइन पेमेंट करने से बचना चाहिए। अभिभावक भी बच्चों पर नजर रखें। उन्हें गेम की आदत नहीं पड़ने दें। साइबर सेल की टीम अक्सर विद्यालयों में जाकर छात्र-छात्राओं को इन गेम के नुकसान के बारे में बताती है।