कासगंज। लोगों की सहूलियत के लिए बनाई गईं सड़कें जानलेवा साबित हो रही हैं। जिले में औसतन तीन दिन में एक व्यक्ति की जान जा रही है। निर्माण के दौरान सड़कों में रही खामी से सड़कों पर खून बह रहा है। पिछले एक साल में दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों में 192 जानें जा चुकी हैं।
आईआईटी दिल्ली की टीम द्वारा किए गए सर्वे की जो रिपोर्ट आई है वह चौंकाने वाली है। टीम ने सर्वे के दौरान जिले में 17 ब्लैक स्पॉट का चिह्नांकन किया, जहां सबसे अधिक हादसे हो रहे हैं। सर्वे टीम की रिपोर्ट में रोड़ इंजीनियरिंग की खामी का स्पष्ट जिक्र किया गया है। बाईपास के ब्लैक स्पॉट हों यहां नगरिया का गोलाकुआं, अथैया चौराहा, पथरेकी सहित अन्य स्थान यहां पिछले 1 साल में हुईं सड़क दुर्घटनाओं में 192 लोग अपनी जान गवां चुके हैं।
आंकड़े की नजर से-
- एक वर्ष में हुए सड़क हादसे-377
- एक वर्ष में जान गंवाने वाले-192
- दुर्घटनाओं में घायल लोग-233
यह ब्लैक स्पॉट चिह्नित
गोलाकुआं तीव्र मोड़, हिमांयूपुर मोड़, नदरई नहर, गढ़ी तिराहा, गोरहा बाईपास, नगला पट्टी तीव्र मोड़, थरा चीतरा, अलीपुर बंबा, बकावली मोड़, नगला हीरा, अशोकपुर तीव्र मोड़, दरियावगंज रेलवे क्रॉसिंग, रजमऊ पुलिया, कादरगंज ब्रिज अप्रोज, बाचमई पुलिया, पथरेकी, अथैया।
- सभी थाना क्षेत्रों के ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए जा रहे हैं। सबसे अधिक हादसे कहां हुए इसकी भी रिपोर्ट तैयार कराई जा रही है। हमारा प्रयास है कि संबंधित विभागों से सामंजस्य बनाकर ब्लैक स्पॉट खत्म कराए जाएं।- रोहन प्रमोद बोत्रे, एसपी।
- आईआईटी की सर्वे रिपोर्ट मिल चुकी है। टीम ने रोड एक्सीडेंट के पीछे माना है निर्माण के दौरान मोड़ों पर सुपर एलीगेशन नहीं हुए। सुधार के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है, जिससे ब्लैक स्पॉड खत्म हो सकें।- सुधीर कुमार, अधिशासी अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
- ओवर स्पीड के कारण भी सड़क हादसे हो रहे हैं। जिले की सड़कों पर गति सीमा निर्धारित है। दोपहिया 40 और चौपहिया वाहन 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलाए जा सकते हैं। ओवरस्पीड में एक वर्ष में 106 चालान किए हैं।- राजेश राजपूत, एआरटीओ।