जो शहर कभी निवेशकों की पहली पसंद था। वहां तीन साल में हालात बदल गए। अब यहां खोजे से निवेशक नहीं मिल रहे हैं। पांचवीं बार ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी) की तैयारी शुरू हो गई है। 12 करोड़ रुपये निवेश के लिए केवल सात समझौता ज्ञापन (एमओयू) मिल सके हैं।
फरवरी 2023 में जब लखनऊ में ग्लोबल इन्वेस्टर समिट आयोजित की गई थी, तब आगरा प्रदेश में निवेश में दूसरे स्थान पर था। करीब तीन लाख करोड़ रुपये निवेश के 300 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद जागी थी। लेकिन तीन साल में ही हालात बदल गए।
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ताज ट्रेपेजियम जोन (टीटीजेड) की पाबंदियां, भूमि का संकट और अधिकारियों का गैर जिम्मेदार रवैया निवेश को धरातल पर उतारने में सबसे बड़ी बाधा साबित हुआ। नतीजा तीन लाख करोड़ का निवेश सिमट कर 70 हजार रुपये रह गया। करीब 2.30 लाख रुपये के निवेशक आगरा छोड़कर जेवर, नोएडा व अन्य जिलों की तरफ कूच कर गए।
बचे हुए निवेश को धरातल पर उतारने में भी उद्योग विभाग को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। जनवरी 2026 में प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी के लिए सिर्फ सात एमओयू तैयार हो सके हैं। जिनसे करीब 12 करोड़ रुपये निवेश होगा। पिछले साल आयोजित सेरेमनी में करीब 10 हजार करोड़ रुपये निवेश का दावा अधिकारियों ने किया था। कुल मिलाकर 70 हजार करोड़ में 60 हजार करोड़ रुपये का निवेश अधर में फंसा है।
सीमित हुए निवेश के विकल्प
टीटीजेड में नए उद्योगों की स्थापना और पुराने उद्योगों के विस्तार पर सुप्रीम कोर्ट की रोक है। मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसे में फिलहाल यहां निवेश के विकल्प भी सीमित हैं। होटल, हॉस्पिटल व अन्य बिल्डिंगों में ही निवेश संभव है। नई फैक्टरी या उद्योग धंधे स्थापित नहीं हो सकते।
टीटीजेड से निवेश प्रभावित
अनुज कुमार, संयुक्त आयुक्त, उद्योग ने बताया कि ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। करीब 12 करोड़ रुपये के सात एमओयू धरातल पर उतारे जाएंगे। टीटीजेड से निवेश प्रभावित हुआ है।