उत्तर प्रदेश के आगरा में हर बार की तरह इस बार भी जिला ओलंपिक संघ वार्षिक खेलकूद कैलेंडर जारी कराने में नाकाम रहा है। शहर के किसी भी खेल संघ ने जिला ओलंपिक संघ को खेलकूद का वार्षिक कैलेंडर नहीं दिया है। इस बार वार्षिक कैलेंडर को खास माना जा रहा था। संघ के पदाधिकारी पहले कह चुके थे कि सरकार के खेलों के प्रति बढ़ रहे रुझान को मजबूती देने के लिए हरेक खेल संघ को कैलेंडर देना जरूरी होगा।
जिला ओलंपिक संघ के सचिव राहुल पालीवाल कहते हैं कि 10 साल से कोई भी खेल संघ वार्षिक खेलकूद कैलेंडर नहीं दे रहा है। पहले ऐसा होता था। वार्षिक कैलेंडर जारी होने से खिलाड़ी मानसिक रूप से अपने को तैयार कर लेता है। उसे मालूम होता है कि किस महीने में किस चैंपियनशिप में प्रतिभाग करना है। उसका नियमित टाइम टेबल बन जाता है।
वार्षिक कैलेंडर हर एक खेल संघ के लिए जरूरी
पालीवाल का कहना है कि खेल और खिलाड़ियों को लेकर सरकार गंभीर है। 12 महीने खेलों का माहौल बन चुका है। वार्षिक कैलेंडर हर एक खेल संघ के लिए जरूरी होना चाहिए। इससे खिलाड़ी प्रतियोगिता के लिए मानसिक रूप से तैयार हो जाता है।
खेल प्रतियोगिताओं की विरासत नहीं संभाल पाया
जिला ओलंपिक संघ अपने खेल प्रतियोगिताओं की विरासत को नहीं संभाल पा रहा है। संघ की ओर से आखिरी बार जिला ओलंपिक खेल सन 1994 में हुए थे। इसमें खिलाड़ियों का हुजूम उमड़ता था।
16 साल बाद होंगे संघ के चुनाव
वर्ष 2007 में आखिरी बार जिला ओलंपिक संघ के चुनाव हुए थे। नियमों के अनुसार हर चार साल में चुनाव हो जाने चाहिए। 16 साल से चुनाव नहीं होने पर संघ के सचिव राहुल पालीवाल कहते हैं कि अप्रैल के आखिरी या मई के पहले सप्ताह में संघ के चुनाव होंगे।