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UP: खाली जमीनों पर कब्जे...फर्जी दस्तावेज से बैनामे, सदर तहसील में सक्रिय गिरोह; पुलिस के रडार पर 20 से अधिक

Thu, 23 Jan 2025 10:08 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

खाली जमीन पर कब्जा किया जाता है। इसके बाद फर्जी दस्तावेज से बैनामा कर दिया जाता है। इसके लिए एक पूरा गिरोह आगरा में सक्रिय है।  
 
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फर्जी दस्तावेज - फोटो : amar ujala digital
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विस्तार
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आगरा सदर तहसील में फर्जी वसीयत, बैनामा, एग्रीमेंट, पट्टे, मुख्तारनामा तैयार करने वाला गिरोह सक्रिय है। खाली पड़ी जमीनों का पता कर गिरोह मूल दस्तावेजों के स्थान पर फर्जी दस्तावेज लगा देता है। गिरोह के लोग तहसील कर्मियों की सांठगांठ से फर्जीवाड़े को अंजाम देते हैं। बोदला के बाद फिर पुलिस के पास करीब 10 शिकायतें पहुंची हैं। इनमें 25 से अधिक लोग पुलिस की रडार पर हैं।
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हाल ही में फर्जी तरीके से जमीनों के बैनामे और तहसील से दस्तावेज गायब करने के मामले में सदर और शाहगंज थाने में 4 केस दर्ज हैं। इनमें 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से तहसील में सक्रिय गिरोह और एक पूर्व कर्मचारी के खिलाफ केस भी शामिल है। पुलिस चारों प्रकरण में जांच कर रही है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि किसी की जमीन पर फर्जी दस्तावेज से कब्जा किया गया है तो किसी की जमीन को बेच दिया गया। साैदा करने वाले से लेकर गवाही देने वाले भी फर्जी हैं। कई गिरोह के बारे में जानकारी मिली है। इनमें ताजगंज, सिकंदरा, जगदीशपुरा, सदर सहित अन्य इलाके शामिल हैं।

 

यह गिरोह पहले खाली पड़ी जमीनों को चिह्नित करते हैं। तहसील से दस्तावेज निकलवाए जाते हैं। मूल दस्तावेजों को बदल दिया जाता है। इसके बाद फर्जी विक्रेता से लेकर गवाह तक बनाकर बैनामा कर दिया जाता है। एक के बाद एक लोगों को शिकार बनाया जा रहा है। डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि कई मामले पुलिस के पास पहुंच गए हैं। इनमें टीम जांच कर रही हैं। साक्ष्य संकलन करने के बाद मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं।

 

इन मामलों में हुई कार्रवाई
केस -1
2 दिसंबर 2024 को ट्रांस यमुना काॅलोनी निवासी साैरभ गुप्ता ने मुकदमा दर्ज कराया था। उन्होंने पुलिस आयुक्त से शिकायत की थी। बताया कि रजिस्ट्री कार्यालय में एक फर्जी एवं कूटरचित पट्टा बही नंबर 01 जिल्द संख्या 62 पृष्ठ संख्या 309 से 311 में किसी मूल दस्तावेज को हटाकर उसके स्थान पर दूसरा स्थापित किया गया है। पट्टे को गंगाराम की ओर से सत्य प्रकाश अवस्थी के नाम निष्पादित होना दर्शाया है। फर्जी प्रपत्र को निबंधन कार्यालय की जिल्द में कूटरचित तरीके से स्थापित किया गया है। इसमें जांच के बाद कार्रवाई हुई।

 

केस - 2
9 नवंबर 2024 को मुस्तफा क्वार्टर की रहने वाली सरोज ने केस दर्ज कराया। वह किराये के मकान में रहती हैं। मजदूरी करती हैं। इसका फायदा उठाकर 3 साल पहले एचआईजी, इंद्रापुरम निवासी प्रशांत शर्मा घर आने लगा। बेटी की शादी कराने का आश्वासन दिया। एक दिन तहसील ले जाकर कुछ कागजात पर हस्ताक्षर कराए गए। जमीन लेने के लिए गवाही देने की बात कही। बाद में कुछ लोग घर आए। वह जमीन बेचने के बारे में पूछने लगे। तब पता चला कि प्रशांत शर्मा ने झूठ बोलकर एक फर्जी एग्रीमेंट अपने नाम से करा लिया है, जबकि उनके पास अपनी कोई जमीन नहीं है।

 

केस - 3
21 जनवरी को केन्द्रीय अभिलेखागार में संरक्षित अभिलेखों में हुई छेड़छाड़ के मामले में थाना शाहगंज में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसमें 11 को नामजद किया गया। आरोपियों में बाह निवासी राजकुमार, आलमगंज निवासी प्रबल प्रताप सिंह चाैहान, माईथान निवासी श्यामलाल शर्मा, पुरानी मंडी निवासी सत्यप्रकाश, राजा मंडी निवासी भानु रावत, आवास विकास काॅलोनी निवासी प्रशांत शर्मा, बसई खुर्द निवासी ब्रजेश दुबे, नगला बीच निवासी शिवचरन, सेक्टर चार निवासी सुमित अग्रवाल, इंद्रापुरम निवासी प्रशांत शर्मा और देवदत्त शर्मा शामिल हैं।

 

केस -4
19 जनवरी को गाैतम नगर, कोटली बगीची निवासी सुनीता देवी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया। उनसे कुछ लोगों ने गोकुलम काॅलोनी, रोहता में 5 लाख रुपये में जमीन का साैदा किया गया। जब वह जमीन पर कब्जा लेने गईं तो नाई की मंडी की महिला ने रजिस्ट्री दिखाकर जमीन अपनी बताई। मुकदमे में रविंद्र उर्फ रवि, केतन, सिंह, शिवा और कपूरचंद को नामजद किया। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। दो आरोपी फरार हैं।

 
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बिल्डर-पुलिस के गठजोड़ से हुआ था कब्जा
जनवरी 2024 में बोदला में बैनारा फैक्ट्री के पास करोड़ों की जमीन का मामला सामने आया था। दो फर्जी मुकदमे लिखकर केयरटेकर के परिवार को जेल भेजा गया था। फर्जी मालकिन उमा देवी सामने आई थी। उसने जमीन को अपना बताया था। पुलिस की जांच में असली मालिक टहल सिंह का पता चला। उन्होंने भी जमीन का साैदा किसी और को किया था। जमीन पर कब्जे की पटकथा पुलिस और बिल्डर के गठजोड़ से लिखी गई थी। मामले में थाना जगदीशपुरा के तत्कालीन एसओ को जेल जाना पड़ा। बिल्डर के सहयोगी भी पकड़े गए। केस में चार्जशीट लगाई गई थी। हालांकि बाद में यह विवेचना सीबीसीआईडी भेजी गई है।
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