आगरा। शहर के एकमात्र प्रेक्षागृह सूरसदन को कोई पीपीपी मोड पर संचालित करने के लिए तैयार नहीं हो रहा है। रखरखाव और संचालन में घाटे के कारण आगरा विकास प्राधिकरण ने पीपीपी मोड का प्रस्ताव रखा था। तीन बार इस प्रस्ताव पर इच्छुक फर्मों से आवेदन मांगे गए लेकिन किसी ने रुचि नहीं दिखाई। एडीए अब पीपीपी मोड प्रस्ताव की कीमतों में बदलाव पर विचार कर रहा है।
आगरा के सांस्कृतिक आयोजनों की कभी पहली पसंद रहा सूरसदन अब उपेक्षा का शिकार है। एडीए की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रेक्षागृह का मासिक खर्च इसकी आय से कहीं अधिक है। बिजली बिल, सुरक्षा और सफाई व्यवस्था का बोझ इतना बढ़ गया है कि प्राधिकरण के लिए इसे चलाना अब सफेद हाथी पालने जैसा हो गया है। इसी बोझ को कम करने के लिए इसे निजी हाथों में सौंपने की योजना बनी थी, जो अब तक कागजों से बाहर नहीं निकल पा रही है। एडीए की तमाम कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। एडीए उपाध्यक्ष एम अरुन्मोली का कहना है कि सूरसदन को बेहतर बनाने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। निविदा की शर्तों को और अधिक व्यावहारिक बनाएंगे।