किरावली के तेवतिया वाटर पार्क में आठ वर्षीय मनित की डूबने से मौत के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी आरोपी पर कार्रवाई नहीं हुई है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहा है, जबकि पुलिस मानकों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की जांच में जुटी है।
आगरा के किरावली स्थित तेवतिया वाटर पार्क में आठ साल के बालक की लापरवाही से माैत के मामले में पुलिस की जांच धीमी गति से चल रही है। हादसे के जिम्मेदार मालिक और कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। पीड़ित परिवार परेशान है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट प्रशासन को भेजी गई है। मानकों की अनदेखी के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है।
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अजीत नगर, खेरिया मोड़ निवासी राॅबिन सिंह 17 मई की शाम करीबन पांच बजे पत्नी, दो बच्चे और माैसी के तीन बच्चों के साथ तेवतिया वाटर पार्क गए थे। उन्होंने बताया था कि छोटे बेटे को टॉयलेट लेकर गए थे। बड़ा बेटा आठ वर्षीय मनित पूल में नहा रहा था। उससे कहा था कि कहीं नहीं जाना। वापस आने पर मनित नहीं मिला। इस पर तलाश की, लेकिन वो कहीं नहीं मिला। इस बारे में कर्मचारियों को बताया मगर उन्होंने कोई मदद नहीं की। बाद में वह पानी में डूबा हुआ मिला।
आरोप लगाया कि कर्मचारियों की लापरवाही की वजह से बेटा पानी में डूब गया। पुलिस ने वाटर पार्क में पहुंचकर जांच की थी। लापरवाही से मृत्यु के मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। विवेचक ने सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे थे। इसके बाद मालिक श्यामू के नाम की वृद्धि कर दी गई, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हुआ। पीड़ित पिता का कहना है कि आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। जिन लोगों की लापरवाही की वजह से बेटे की जान गई, उनकी गिरफ्तारी कर जेल भेजा जाए। पुलिस सुनवाई नहीं कर रही है। 22 मार्च को कैंडल मार्च निकाल रहे थे, लेकिन पुलिस ने रोक दिया। कार्रवाई का आश्वासन दिया।
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रिपोर्ट दी गई है, साक्ष्य संकलन कर रहे : डीसीपी
मामले में डीसीपी पश्चिमी जोन आदित्य सिंह का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे गए हैं। जांच की गई है कि वाटर पार्क में मानक के अनुसार लाइफ गार्ड थे या नहीं? डूबते लोगों को बचाने के लिए डंडा होना चाहिए, वो था या नहीं? रिस्पांस टाइम क्या था? बच्चा डूबा तो किसी ने देखा या नहीं? बच्चा कहां और कितनी दूरी पर डूबा? इस सभी की जानकारी जुटाई जा रही है। संबंधित विभागों ने मानकों के संबंध में क्या रिपोर्ट दी? यह सब पता किया जा रहा है। प्राथमिकी लापरवाही से मृत्यु के मामले में दर्ज की गई। इस धारा में सात साल से कम सजा का प्रावधान है।