आगरा जिला अस्पताल में सेंट्रल लैब सालभर में शुरू नहीं हो पाई है। लैब की छत की अभी तक मरम्मत नहीं की है। इसके कारण इसमें मशीनें और उपकरण स्थापित नहीं किए गए हैं। लैब पर ताला लगा हुआ है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है। कई ऐसी जांचें हैं, जिनको निजी लैब में कराना पड़ रहा है।
बीते साल शासन ने सेंट्रल लैब बनाने के लिए 82 लख रुपये की धनराशि स्वीकृत की थी। लैब बनने के बाद शासन जांच के लिए मशीनें और उपकरण भी भेजेगा। लैब के लिए ओपीडी इमारत की चौथी मंजिल पर बने हॉल में लैब के लिए सेटअप बनाया जा रहा है। अभी इसमें फॉल्स सीलिंग टूटी हुई है। सेंट्रल लैब बनने से इसमें माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमेस्ट्री से जुड़ी बीमारियों की भी जांच हो सकेगी।
लैब का कार्य पूरा नहीं होने के कारण मशीनें भी स्थापित नहीं हो पा रही हैं। जिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षिका डॉ. सुनीता राठौर ने बताया की हाल ही में कार्यदायी संस्था की टीम ने निरीक्षण भी किया, लेकिन कार्य पूरा नहीं किया है। मशीनें आ चुकी हैं, लेकिन लैब तैयार नहीं होने के कारण ये शुरू नहीं हो पा रहीं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेज रहे हैं।
वायरल-बैक्टीरिया जनित बीमारियों की जांच की सुविधा
सेंट्रल लैब बनने से इसमें पैथोलॉजी विभाग भी स्थापित हो जाएगा। इस लैब के जरिये से वायरस जनित और बैक्टीरिया जनित बीमारियों की जांच की सुविधा मिल सकेगी। इस तरह से जिला अस्पताल में करीब 250 तरह की जांचों की सुविधा हो जाएगी।