पानी की बर्बादी रोकने के लिए अब सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। 25 अप्रैल से आगरा के 15 ब्लॉक में ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाया जाएगा, जो पानी की फिजूल बर्बादी करते हैं। गांव में पंचायत सचिव, सहायक एवं एडीओ सबमर्सिबल की निगरानी करेंगे।
उत्तर प्रदेश के आगरा में 15 ब्लॉक की सभी ग्राम पंचायतों में 25 अप्रैल से नई व्यवस्था लागू होने जा रही है। ऐसे में यदि सबमर्सिबल पंप का बटन दबाकर भूल जाने की आदत है तो सुधार लें। फिजूल पानी बहाने पर अब सबमर्सिबल पंप सील होंगी। फिर बिजली कनेक्शन कटेगा। गांव-गांव पंचायत सचिव, सहायक व एडीओ निगरानी करेंगे। लापरवाही मिलने पर पानी फैलाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
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जिले में भूजल संकट से 15 में 12 ब्लॉक डार्क जोन घोषित हैं। भूजल स्तर 250 से 350 फुट गहरा है। ऐसे में बूंद-बूंद पानी बचाने और फिजूल पानी बहाने से रोकने के लिए मुख्य विकास अधिकारी ए मनिकन्डन ने सख्ती बरतने के निर्देश दिए हैं। 15 ब्लॉक में बीडीओ से लेकर ग्राम पंचायत सचिव, सहायक एवं एडीओ तक सबमर्सिबल पंप से पानी बर्बाद करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई कर सकेंगे।
सीडीओ ने बताया कि गांव में सबमर्सिबल पंप के आस-पास जलभराव होता है। पानी नालियों में बहकर तालाब, पोखर व रास्तों में भर जाता है। इसे रोकने के लिए सभी ब्लॉक में अभियान शुरू करने जा रहे हैं। पहली बार में चेतावनी नोटिस दिया जाएगा। दूसरी बार में पंप सील कर बिजली कनेक्शन काटा जाएगा। इसके लिए संचालक स्वयं जिम्मेदार होगा।
30 मिनट में पांच हजार लीटर पानी दोहन
जल निगम के पूर्व अभियंता बीएम शर्मा के मुताबिक दो हॉर्स पावर की एक सबमर्सिबल पंप 30 मिनट में पांच हजार लीटर पानी का दोहन करती है। यदि 30 मिनट भी पंप फालतू चलता है तो करीब पांच हजार लीटर भूजल बर्बाद हो सकता है। शहरी क्षेत्र में करीब 4.50 लाख सबमर्सिबल पंप भूजल का दोहन कर रही हैं।
बोरिंग से पहले बनाना होगा सोक पिट
सीडीओ ए मनिकन्डन ने बताया कि प्रत्येक निजी व सरकारी सबमर्सिबल, हैंडपंप व टीटीएसपी टंकी के लिए बोरिंग करने से पहले भूजल रिचार्ज के लिए सोक पिट बनाना अनिवार्य होगा। सबमर्सिबल पंप का फिजूल पानी सोक पिट में जाना चाहिए। सरकारी पेयजल योजनाओं के लिए होने वाले बोरिंग में भी सोक पिट अनिवार्य होगी।
सबमर्सिबल का हो सकेगा सत्यापन
भूगर्भ जल अधिनियम 2019 लागू होने के बाद अब प्रत्येक बोरिंग के लिए पंजीकरण कराना अनिवार्य है। बिना पंजीकरण बोरिंग पर रोक है। जिले में 690 गांव हैं। किस गांव में कितने सबमर्सिबल पंप हैं इसका कोई रिकॉर्ड पंचायत राज विभाग के पास नहीं है। सीडीओ ने बताया कि पानी बहाने की जांच के साथ जिले में सभी सबमर्सिबल का सत्यापन कर उनका ब्योरा तैयार किया जाएगा।