आगरा के बालूगंज में डीआईजी आवास की 6.16 बीघा भूमि का जालसाजों ने 12 करोड़ रुपये में सौदा कर दिया। जिसमें 4 बीघा 6 विस्वा नजूल भूमि शामिल है। इस मामले में बृहस्पतिवार को पुलिस ने दूसरी एफआईआर दर्ज कराई है। लेकिन, दिलचस्प बात यह है कि शहर में नजूल भूमि का 167 साल से सही से सर्वे ही नहीं हुआ।
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शहरी क्षेत्र में आखिरी बार 1858 में नजूल भूमि का सर्वे हुआ था। तब नगर की सीमा में 3364.27 एकड़ नजूल भूमि थी। आंकड़ों के अनुसार 1919 तक 742 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे थे। 1927 में तत्कालीन सेंटलमेंट ऑफिसर आरएफ मुडली ने नजूल भूमि सर्वे के लिए 24,464 रुपये का प्रस्ताव भेजा था। तब एक विशेष टीम बनाकर सर्वे कराने की कवायद हुई, लेकिन बजट नहीं मिलने से सर्वे नहीं हो सका।
आजादी मिलने के बाद शहर में बड़े पैमाने पर नजूल भूमि का फर्जीवाड़ा हुआ। जोंस मिल की जांच के दौरान 2020 में प्रशासनिक रिपोर्ट में नजूल भूमि का फर्जीवाड़ा सामने आया था। कलेक्ट्रेट में तैनात तत्कालीन नजूल मोर्हरिर गिर्राज को धन लोलुपता के आरोप में निलंबित किया गया। बिल्डर व भूमाफिया को लाभ पहुंचाने के लिए नजूल भूमि की एनओसी दी गई थी। तत्कालीन एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने तब नजूल अभिलेखों का राजस्व अभिलेखों से मिलान कराने, स्थलीय और भौतिक सत्यापन कराने की संस्तुति की थी। साथ ही अक्षांश व देशांतर चिह्नांकन कराने और भूमि की सूची बनाने के लिए कहा था।
भूमाफिया ने खुर्दबुर्द की 107 करोड़ की भूमि
मौजा घटवासन में भूमाफिया ने 107 करोड़ रुपये की नजूल कूटरचित दस्तावेजों से खुर्दबुर्द कर दी। पांच साल से इस मामले की फाइल आर्थिक अपराध शाखा में जांच के नाम पर धूल फांक रही है। बालगूंज में खसरा संख्या 626 में 6.16 बीघा भूमि थी। जिसमें 4 बीघा 6 विस्वा नजूल और 1 बीघा 12 विस्वा निजी भूमि थी। 1957 से इस भूमि पर कब्जा था। जिसे जालसाजों ने कूटरचित दस्तावेजों से बेच दिया।
सावधान... जमीन खरीदने से पहले एनओसी मांगे
चंद दिनों में करोड़पति बनने के लिए भूमाफिया बेशकीमती जमीनों का कूटरचित दस्तावेजों से सौदा कर रहे हैं। फर्जी बैनामा, वसीयत तक बन रही हैं। रजिस्ट्री दफ्तर के केंद्रीय अभिलेखागार से कलेक्ट्रेट व तहसील तक अभिलेखागार से रिकॉर्ड गायब हैं। ऐसे में कोई भी जमीन खरीदने से पहले पड़ताल कर लें। जमीन खरीदने से पहले एनओसी जरूर मांगे।
लगाए जा रहे हैं बोर्ड
जिलाधिकारी अरविंद मल्लप्पा बंगारी ने बताया कि खाली पड़ी नजूल भूमि पर कोई अतिक्रमण न करें। इस आशय के बोर्ड लगाए जा रहे हैं। शहर में नजूल भूमि का सर्वे कराया जाएगा। सूची बनाई जाएगी।