पूरा देश इसरो दिवस के दिन अंतरिक्ष में भारत की सफल यात्रा का उत्सव मनाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की स्थापना डॉ. विक्रम साराभाई के नेतृत्व में 15 अगस्त 1969 को हुई और तभी से भारत की अंतरिक्ष विज्ञान की यात्रा शुरू हुई। यह यात्रा बैलगाड़ी पर उपग्रह के हिस्सों को लाने के साथ शुरू हुई, लेकिन 55 साल बाद अब इसरो का रोवर चांद की सतह पर इसरो के निशान उकेर रहा है।
इसरो दिवस पर संस्थान से जुड़ी ऐसी प्रसिद्ध घटना है, जब जब उपग्रह के लिए इस्तेमाल किए गए रॉकेट के कुछ हिस्सों को बैलगाड़ी से ले जाया गया था। यह खबर अमर उजाला संस्करण में 20 जून 1981 को प्रकाशित हुई थी। यह बात है 19 जून 1981 की जब एप्पल (एरियन पैसेंजर पेलोड एक्सपेरिमेंट) उपग्रह जो भारत का पहला स्वदेशी संचार उपग्रह था। उस समय इसरो के पास परिवहन सुविधाएं नहीं थीं। इसलिए उपग्रह के एंटेना के कुछ हिस्सों को परीक्षण के लिए श्रीहरिकोटा में इसरो के स्टेशन तक बैलगाड़ी पर लाया गया था। उसके बाद उसे फ्रेंच गयाना से लॉन्च किया गया था। तब बैलगाड़ी से उपग्रह के हिस्सों को लाने से लेकर अब चांद पर रोवर उतारने तक की इसरो की यात्रा यादगार है।
महत्वपूर्ण मिशन और उपलब्धियां
आर्यभट्ट- 19 अप्रैल 1975, यह भारत का पहला उपग्रह था।
एप्पल- 19 जून 1981, भारत का पहला स्वदेशी संचार उपग्रह।
इनसेट-1बी- 30 अगस्त 1983, इनसेट श्रृंखला का पहला सफल उपग्रह।
आईआरएस-1ए- 17 मार्च 1988, पहला भारतीय रिमोट सेंसिंग उपग्रह।
मंगलयान- 5 नवंबर 2013, मंगल पर भेजा गया पहला भारतीय मिशन।
चंद्रयान-1- 22 अक्टूबर 2008, चंद्रमा पर भेजा गया पहला भारतीय मिशन।
चंद्रयान-2- 22 जुलाई 2019, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतारने का प्रयास।
चंद्रयान-3- 14 जुलाई 2023, चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरने वाला मिशन।