आगरा कालेज के प्राचार्य पद के मामले में शुक्रवार को एक और नाटकीय मोड़ आया। अब नरेंद्र यादव प्राचार्य का पदभार संभालेंगे। कमिश्नर ने शुक्रवार को वरिष्ठता की दावेदारी करने वाले डा. एके गुप्ता, डा. रेखा पतसरिया और डा. नरेंद्र यादव का पक्ष सुनकर यादव के नाम पर मुहर लगाई। इसके बाद नरेंद्र यादव ने दोपहर को पदभार ग्रहण कर लिया। स्टाफ क्लब और समर्थक शिक्षकों ने उनका स्वागत किया।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्राचार्य डा. मनोज रावत ने बुधवार को पद छोड़ दिया। उनके स्थान पर डा. एके गुप्ता को जिम्मेदारी सौंपी गई। गुरुवार को नरेंद्र यादव ने खुद को वरिष्ठ बताते हुए इसका पुरजोर विरोध किया। वरिष्ठता के लिए तीसरी दावेदारी डा. रेखा पतसरिया ने की। विवाद बढ़ने पर शुक्रवार को कमिश्नर ने तीनों पक्षों को सुना। शासनादेश का हवाला देते हुए यादव को प्राचार्य का पदभार दिलाया।
नरेंद्र यादव की शैक्षणिक योग्यता स्नातक है। कमिश्नर ने उनके नाम का कोई शासनादेश नहीं दिखाया है। यह सत्ता के दबाव में लोकतंत्र की हत्या की गई है।
- डा. एके गुप्ता
दावेदारों में सबसे वरिष्ठ होने के कारण शासन और कमिश्नर ने यह निर्णय सुनाया है। उल्टी-सीधी बयानबाजी विरोधियों की बौखलाहट है।
- नरेंद्र यादव
वरिष्ठता ध्यान में रखी है, शैक्षणिक योग्यता नहीं देखी। कमिश्नर को अधिकार है, वह किसी को भी ये जिम्मेदारी सौंप सकते हैं।
- डा. रेखा पतसरिया
शासनादेश के तहत और वरिष्ठतम नरेंद्र यादव को कालेज के प्राचार्य का पदभार ग्रहण कराया गया है।
- चंद्रकांत, कमिश्नर
विश्वविद्यालय से तीनों दावेदारों की वरिष्ठता सूची मांगी गई है। तब तक प्राथमिक तौर पर वरिष्ठता के आधार पर नरेंद्र यादव प्राचार्य पदभार संभालेंगे।
- डा. टीवीएस यादव, उच्च शिक्षाधिकारी