ऑनलाइन से पढ़ाई ऑफलाइन हुई तो तनाव में आई छात्रा ने घर छोड़ दिया। वह अपने घर से करीब 250 किलोमीटर का सफर तय करके आगरा पहुंच गई। यहां आईएसबीटी पर एक युवक को ये छात्रा मिली, जिसके बाद चाइल्ड लाइन की मदद से उसे घर पहुंचाया गया।
नलाइन से ऑफलाइन शुरू हुई पढ़ाई से तनाव में आकर मुरादाबाद की छात्रा आगरा आ गई। वह एक युवक को ऑटो में मिल गई। उसने समझदारी दिखाई। छात्रा को थाना सिकंदरा ले गया। बाद में चाइल्ड लाइन की मदद से उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किया गया। उसे घर पहुंचा दिया गया है। अब उसकी काउंसिलिंग की जा रही है।
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मुरादाबाद के थाना मझोला क्षेत्र की रहने वाली आठवीं की छात्रा 13 साल की है। 23 मार्च को घर से आगरा आ गई थी। आईएसबीटी पर बस से उतरने के बाद ऑटो से सिकंदरा के लिए बैठ गई। ऑटो में एक युवक भी सवार था। युवक से वह बार-बार सवाल कर रही थी। इस पर उसे शक हो गया। उसने बाल कल्याण समिति के एक सदस्य को जानकारी दी। उन्होंने उसे थाना सिकंदरा ले जाने के लिए बोल दिया। उन्होंने ऐसा ही किया। बाद में छात्रा को समिति के समक्ष पेश किया।
चाइल्ड लाइन समन्वयक रितु वर्मा ने बताया कि छात्रा से बात की। उसने बताया कि कोरोना काल में माता-पिता की मौत हो चुकी है। वह ताऊ के पास रहती है। बड़ी बहन बीकॉम कर रही है। मामा दरोगा हैं। उनके दोस्त आगरा में रहते हैं। इसलिए वह यहां आई है। हाल ही में उसे पता चला था कि पढ़ाई ऑनलाइन बंद हो गई है। रोजाना सुबह उठना और स्कूल जाने से परेशान है। इससे वह तनाव में है। उसका पूर्व में प्रैक्टिकल भी खराब हो गया था। उसे घर पहुंचा दिया गया। अब उसकी फोन से काउंसिलिंग की जा रही है।
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ये हैं प्रमुख समस्या
- सिलेबर पूरा नहीं हुआ है। परीक्षा शुरू होने वाली हैं।
- स्कूल जाने पर किसी की मदद नहीं ले सकते। घर पर परिजन बता देते हैं।
- शिक्षक-शिक्षिका के सामने रहना पड़ता है। छुट्टी भी देर से हो रही है।
- बच्चों की आपस में मिलने जुलने जैसी आदत भी खत्म हो गई है।
यह कहते हैं चिकित्सक
मानसिक स्वास्थ्य संस्थान एवं चिकित्सालय के अधीक्षक डीएमएस राठौर का कहना है कि दो साल से बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई की आदत हो गई थी। अब ऑफलाइन से वो तनाव में आ सकते हैं। इसलिए बच्चों को पढ़ाई के लिए जोर नहीं दें। स्कूल जाने को लेकर जबर्दस्ती नहीं करें। उन्हें समझाएं कि स्कूल जाएं। डरने की जरूरत नहीं है।