फिल्म दसवीं की शूटिंग एक महीने से अधिक केंद्रीय कारागार में चली। अभिनेता अभिषेक बच्चन ने कैदियों के बीच रहकर उनकी जिंदगी से रूबरू होकर फिल्म के सीन किए। यही वजह है कि अब उन्होंने बंदीयों के जीवन में बदलाव लाने के लिए पहल की है। इसके लिए जेल के पुस्तकालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, महात्मा गांधी, रूसी साहित्यकार लियो टॉल स्टाय, रवींद्र नाथ टैगोर, सरोजनी नायडू सहित भारत के महान लोगों के जीवन से जुड़ी 350 किताबें उपहार में दी हैं। इससे न सिर्फ बंदी किताबें पढ़ सकेंगे, बल्कि महान लोगों के जीवन के बारे में जानकर खुद में भी बदलाव ला सकेंगे।
फरवरी और मार्च 2021 में फिल्म दसवीं की शूटिंग जेल में हुई थी। इसमें अभिषेक बच्चन के साथ अभिनेत्री यामी गौतम और निमरत कौर भी आई थीं। फिल्म में अभिषेक ने जाट नेता गंगाराम चौधरी का रोल किया है। निमरत उनकी पत्नी बनी है। वहीं यामी गौतम ने जेल अधिकारी का किरदार निभाया है। बंदियों के बीच रहकर वो दसवीं पास करते हैं।
मंगलवार को जेल परिसर में फिल्म की स्क्रीनिंग की गई थी। अभिषेक बच्चन, यामी गौतम, निमरत कौर और फिल्मी की यूनिट भी मौजूद रही। स्क्रीनिंग के बाद यूनिट की तरफ से जेल पुस्तकालय के लिए 350 पुस्तकें दी गईं। वरिष्ठ अधीक्षक वीके सिंह ने बताया कि अभिषेक बच्चन ने कहा कि फिल्म की कहानी बंदी के जेल में आने के बाद दसवीं करने से जुड़ी है। फिल्म का उद्देश्य बंदियों को शिक्षा से जोड़ना है, जिससे वो अपने जीवन में सुधार ला सकें। बंदियों ने भी उनके अभिनय को काफी सराहा।
यह पुस्तकें दीं
टॉल स्टाय की श्रेष्ठ कहानियां, चंद्रगुप्त मौर्य, रविंद्र नाथ टैगोर गीतांजली, लोक व्यवहार, इंदिरा गांधी, विक्रम बेताल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बुद्धिवर्धक कहानियां, मंगल पांडेय, सरोजनी नायडू, ज्ञान सुधा सागर, अपना भाग्य कैसे बनाएं, भारत के महान वैज्ञानिक, श्री हरिवंश पुराण, अग्निपुराण, श्री वराह पुराण, श्री भक्तमाल, योग वशिष्ठ, प्रेरक बाल कहानियां, बक्मिचंद देव चौधरानी, भर्तहरि शतक, दास्तान ए हातिमताई, हितोपदेश, मालिश द्वारा रोग उपचार, शिक्षाप्रद प्रेरक कहानियां, छत्रपति शिवाजी, अकबर बीरबल, डॉ. भीमराव आंबेडकर, झांसी रानी लक्ष्मी बाई, सम्राट अशोक, यादगार कहानियां, महान कवि वुल्लेशाह, फतेहपुर सीकरी एक हिंदू नगर आदि पुस्तकें शामिल हैं।
पुस्तकों को पढ़ सकते हैं बंदी
अभिषेक बच्चन, यामी गौतम, निमरत कौर सहित फिल्म की यूनिट ने 350 पुस्तकें भेंट की हैं। इन्हें पुस्तकालय में रखवाया गया है। इन्हें बंदी पढ़ सकते हैं। - वीके सिंह, वरिष्ठ अधीक्षक, केंद्रीय कारागार