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अब वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों से पार्किंग शुल्क वसूलेगा नगर निगम, सदन में प्रस्ताव पास

Sun, 30 Jun 2019 08:52 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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आगरा नगर निगम
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आगरा नगर निगम अब वाणिज्यिक प्रतिष्ठान के मालिकों से पार्किंग वसूलेगा। नगर निगम सदन के 11वें अधिवेशन में शनिवार को इसका प्रस्ताव रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से पास कर दिया गया। इस पर उपविधि बनाकर इसे लागू किया जाएगा। हालांकि, इस प्रस्ताव में छोटी (रोजमर्रा का सामान रखने वाली) दुकानों को शामिल नहीं किया गया है। 
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शहर में वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के बाहर वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, जबकि वह जमीन नगर निगम की होती है। उस जमीन का लाभ वाणिज्यिक प्रतिष्ठान का स्वामी उठाता है। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उनको पार्किंग शुल्क नगर निगम को अदा करना पड़ेगा। 

अगर कोई वाणिज्यिक प्रतिष्ठान स्वामी पार्किंग शुल्क अदा नहीं करना चाहता है तो उसे खुद की पार्किंग नगर निगम को दिखानी होगी, क्योंकि सड़क पर वाहन पार्किंग होने से न केवल यातायात प्रभावित होता है, बल्कि वायु और ध्वनि प्रदूषण भी बढ़ता है।
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इनसे होगी वसूली 

1. सड़क के किनारे स्थित वाहनों के शोरूम।
2. सड़क के किनारे चलने वाले मोटर गैराज।  
3. प्राइवेट नर्सिंग होम, अस्पताल। 
4. निजी भवनों अथवा वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों जैसे - गेस्ट हाउस, बैंक्वेट हॉल, शोरूम, बैंक, स्कूल, कोचिंग सेंटर।  
5. शॉपिंग मॉल्स
6. बियर बार 
7. रेस्टोरेंट एवं होटल
8. सिनेमा हॉल
9. ट्रांसपोर्ट कंपनी

नगर निगम की बढ़ेगी आय 

वाणिज्यिक प्रतिष्ठान संचालकों से पार्किंग शुल्क वसूलने से न केवल नगर निगम की आय में बढ़ोत्तरी होगी, बल्कि प्रतिष्ठान संचालक भी बेसमेंट में पार्किंग व्यवस्था के प्रति जिम्मेदार होंगे। बताते चले कि अभी तक शहर में बहुत की कम जगहों पर बेसमेंट में पार्किंग की व्यवस्था है। 
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सदन में रखे गए 38 प्रस्ताव, 15 पास 

नगर निगम सदन में कुल 38 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 15 प्रस्ताव पास कर दिए गए, जबकि 24 प्रस्ताव पार्षदों द्वारा वापस कर लिए गए। बताते चलें कि वापस सभी प्रस्ताव निर्माण कार्य से संबंधित थे।

सर्किल रेट के आधार पर वसूला जाएगा शुल्क 

महापौर नवीन जैन ने बताया कि सदन में वाणिज्यिक प्रतिष्ठान संचालकों से पार्किंग शुल्क वसूलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुआ है। छोटी दुकान स्वामियों को इससे बाहर रखा गया है। सर्किल रेट के आधार पर हर वर्ष पार्किंग शुल्क वसूला जाएगा।

इसको लेकर एक उपविधि बनाई जाएगी। इसके बाद इसे लागू कर दिया जाएगा। अगर कोई प्रतिष्ठान संचालक शुल्क जमा नहीं करेगा तो उससे भू-राजस्व वसूली की तरह जिलाधिकारी के माध्यम से वसूली कराई जाएगी।  
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