दोपहर को ऑपरेशन थिएटर में ले जाने के बाद स्टाफ बोला कि ऑपरेशन करना पड़ेगा। रूबी की मां ओमवती देवी ने बताया कि उनसे पूछा कि कौन डॉक्टर ऑपरेशन कर रहे हैं, लेकिन ओटी में सफाई कर्मचारी के साथ नर्स अंदर गई और गेट बंद कर लिया।
कुछ देर बाद नवजात के चीखने की आवाज आई। गेट खटखटाया तो अंदर नर्स बोली कोई बात नहीं है, बच्ची पैदा हुई है। अंदर गए तो रूबी दर्द से तड़प रही थी, खून बिखरा हुआ था। परिजनों ने पूछा कि ऑपरेशन गलत कर दिया क्या?
इस पर नर्स बोली कि डॉक्टर आ रही हैं, दर्द का इंजेक्शन दे देंगी। इतना कहते ही एक-एक कर स्टाफ बाहर चला गया। ओमवती बाहर बैठे अपने रिश्तेदार ब्रह्म सिंह यादव को बुलाकर लाई। थोड़ी देर बाद मौत हो गई।
अस्पताल में कोई स्टाफ न मिलने पर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। पुलिस आई और प्रसूता को दिल्ली गेट अस्पताल भर्ती कराया। जानकारी पर स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची तो उन्हें मरीज के अल्ट्रासाउंड समेत इलाज के पर्चे नहीं मिले। अस्पताल में आठ मरीज भर्ती मिले। काफी देर बाद एक स्टाफ आया। टीम ने मरीज भर्ती पर रोक लगाते हुए दो दिन में मरीजों को शिफ्ट करने के आदेश दिए हैं।
डॉक्टर हैं बाहर, स्टाफ ने ही कर दिया ऑपरेशन
यह अस्पताल डॉ. मनोज अग्रवाल के नाम से पंजीकृत है। स्वास्थ्य विभाग की टीम को निरीक्षण में यहां कोई डाक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिला। परिजनों को भी नहीं मालूम कि किसने ऑपरेशन किया है। आशंका जताई जा रही है कि अनट्रेंड डॉक्टर ने ही प्रसूता का ऑपरेशन कर दिया है।
एसीएमओ डॉ. अजय कपूर ने बताया कि डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ नहीं मिला। ऑपरेशन किसने किया है, इसकी जानकारी भी नहीं हुई है। मरीज के पर्चे भी गायब मिले हैं। आशंका जताई जा रही है कि बिना डॉक्टर के ही स्टाफ ने ऑपरेशन कर दिया है। मरीज भर्ती पर रोक लगाने के साथ ही जांच की जा रही है।