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Taj Mahal: बेगम मुमताज की मौत के बाद क्या हुआ...कैसे छह महीने तक रखा था शव? फिर ताज में दफनाया; पढ़िए पूरी खबर

Mon, 17 Jun 2024 02:21 PM IST
धीरेन्द्र सिंह सलोनी पांडे, आगरा

सार

Taj Mahal: मुमताज को ताजमहल में दफनाने से पहले एक बड़ी चुनौती शव को इतने दिन तक सुरक्षित रखने की थी। अमर उजाला आर्काइव से एक खबर मिली, जिसमें बताया गया है किस तरह मुमताज के शव को 6 महीने तक  सुरक्षित रखा गया था। 

 
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मुमताज की तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मोहब्बत की इबारत लिखने वाले मुगल बादशाह शाहजहां ने बेगम मुमताज की याद में ताजमहल बनवाया और उसी में बेगम की कब्र बनवाई। पर, हर किसी के मन में प्रश्न आता है कि मुमताज की मौत के बाद आखिर कैसे बेगम मुमताज के शव को सुरक्षित रखा गया होगा। अमर उजाला में 15 अप्रैल वर्ष 1960 को ‘मुमताज का शव दफनाने से पहले 6 माह तक सुरक्षित रखा गया था’, शीर्षक से खबर का प्रकाशन हुआ था। इसमें बताया गया कि किस तरह दफनाए जाने से पहले यूनानी विधि से वनस्पतियों से सुरक्षित रखा था।

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बेगम मुमताज का निधन 17 जून 1631 को बुरहानपुर में हुआ था। शव ताजमहल में अंतिम तौर पर 1632 में दफनाया गया। इस्लाम में ममी का स्वरूप देना या उस पर लेप लगाने की मनाही थी। इसलिए मुगल दरबार के हकीमों ने यूनानी विधि को अपनाया था। इस आशय की जानकारी चिकित्सा एवं चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के औषधि इतिहास संग्रहालय के संरक्षक अरमान उल हक के अध्ययन से मिली है।

संरक्षक हक के अनुसार बादशाहनामा ( पहला भाग) जैसे दस्तावेजों में बिना इस्लाम का उल्लघंन किए मृत शरीर को सड़ने से बचाए जाने का जिक्र है। हक ने बताया कि शरीर को सुरक्षित रखने के लिए युनानी तरीके के तहत शव को टिन की ताबूत में रखा गया। यह ताबूत एक लकड़ी के ढांचे में बंद था। इसमें बबूल, मेहंदी का चूरा, कपूर, चंदन का चूरा और कपूर का मिश्रण की परतें थी। शरीर कपड़े में लिपटा था और उस पर कोई लेप नहीं लगाया था। शरीर को सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल किए गये संरक्षण से टिन के ताबूत में एक तरह का वैक्यूम पैदा हो जाता है और इससे शरीर का द्रव सूखने के लिए बाहर निकल जाता है।
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सहायक और रामपुर के बादशाह का भी सुरक्षित रखा
इतिहासकार शाहनवाज खान ने अपनी पुस्तक मातहिर उल उमरा में लिखा है कि मुमताज के सहायक और दरबारी हकीम शती अल निसा का शरीर भी इसी तरीके से लगभग साल भर तक सुरक्षित रखा गया था। रामपुर के बादशाह सैयद मुर्तजा अली खान का शव उनकी मृत्यु के बाद 2 साल तक सुरक्षित रखा गया था। बाद में उन्हें उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार कर्बला में दफना दिया गया।
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