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आगरा: बांदा जेल में बंद बाहुबली मुख्तार अंसारी की वीडियो कान्फ्रेंसिंग से होगी पेशी, यह है मामला

Sun, 05 Sep 2021 12:26 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क अमर उजाला, आगरा

सार

यह मामला 22 साल पुराना है। तब बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी आगरा केंद्रीय कारागार में बंद थे। पुलिस अधिकारियों के निरीक्षण में विधायक से मोबाइल और बुलेट प्रूफ जैकेट मिली थी। इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। इसी पर छह सितंबर को सुनवाई होगी। 
 
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विधायक मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)
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विस्तार
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बांदा जेल में बंद मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी की छह सितंबर को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से आगरा के स्पेशल जज (एमएलए-एमपी) कोर्ट में पेशी होगी। 22 साल पहले केंद्रीय कारागार में निरुद्ध होने के दौरान मुख्तार अंसारी से पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण में मोबाइल और बुलेट प्रूफ जैकेट बरामद हुई थी। इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया था। आरोपी पक्ष की ओर से अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र देकर गलत फंसाने की बात लिखते हुए केस से उन्मोचित करने की याचना की है।

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अधिवक्ता प्रकाश नारायन शर्मा ने कोर्ट में प्रार्थना पत्र देते हुए कहा कि 18 मार्च 1999 को तत्कालीन जिलाधिकारी राजेंद्र कुमार तिवारी और एसएसपी सुबोध कुमार केंद्रीय कारागार का निरीक्षण किया था। तब सेंट्रल जेल में बंद मुख्तार अंसारी से एक मोबाइल और बुलेट प्रूफ जैकेट बरामद दिखाई। इस पर थाना जगदीशपुरा में धोखाधड़ी सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज कराया गया। इसकी विवेचना के बाद आरोप पत्र दाखिल किया। 

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मुख्तार अंसारी के अधिवक्ता ने यह कहा
अधिवक्ता ने तर्क दिया कि मुख्तार अंसारी को राजनैतिक द्वेष के कारण फंसाया गया है। बैरक में कई अपराधी बंद थे। किस अपराधी की पेंट की जेब से मोबाइल मिला, कहा नहीं जा सकता। क्योंकि पेंट को कब्जे में लेकर फर्द नहीं बनाई जा सकती है। एक षड्यंत्र के साथ मोबाइल को मुख्तार अंसारी के साथ जोड़ दिया गया। जेल में मोबाइल पहुंचना भी सुरक्षा पर प्रश्न चिह्न लगाता है। 

आरोप पत्र में किसी कर्मचारी और अधिकारी को आरोपी नहीं बनाया गया। कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। किसकी लापरवाही से मोबाइल बैरक में पहुंचा। उक्त बुलेट प्रूफ जैकेट किसी को नुकसान नहीं पहुंचा सकती है। यह अपनी सुरक्षा के लिए होती है। अत: उनको केस से उन्मोचित किया जाए। कोर्ट ने प्रार्थना पत्र की सुनवाई और पेशी के लिए छह सितंबर की तिथि नियत की है। 


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