इमामबाड़ों में रविवार से मजलिसों का दौर शुरू हो गया। चिल्लीपाड़ा स्थित पुराना इमामबाड़े में मौलाना तुराबी ने मजलिस को खिताब किया। मौलाना ने कहा कि अजादारी हुसैन मोहसिन-ए-इंसानियत है।
ये भी पढ़ें: मोहर्रमः यहां रखा जाता है फूलों का ताजिए, जानिए उसकी तारीख और खासियत
दुनिया के गैरतमंद इंसान पर फर्श-ए-अजा बिछाकर मोहसिन-ए-इंसानियत को खिराज-ए-अकीदत पेश करने का मौका है। हजरत इमाम हुसैन और अहले खानदान ने इंसानियत की खातिर खुद की शहादत दे दी। सभी इमामबाड़ों में हजरत इमाम हुसैन के बलिदान और उनके हज को उमराह में तब्दील करके करबला की ओर रवानगी के बारे में बताया गया।