परिक्रमा में नहीं होगी भीड़, 463 वर्ष पुरानी है परंपरा
आगामी 24 जुलाई आषाढ़ पूर्णिमा यानी मुड़िया पूर्णिमा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार सनातन गोस्वामी का आविर्भाव वर्ष 1488 में पश्चिम बंगाल के रामकेली गांव, जिला मालदा के भारद्वाज गोत्रीय यजुर्वेदीय कर्णाट विप्र परिवार में हुआ था। वे पश्चिम बंगाल के राजा हुसैन शाह के यहां मंत्री थे। चैतन्य महाप्रभु की भक्ति से प्रभावित होकर सनातन गोस्वामी उनसे मिलने बनारस आ गए।
उनकी प्रेरणा से ब्रजवास कर भगवान कृष्ण की भक्ति करने लगे। मुड़िया संतों के अनुसार 1558 में सनातन गोस्वामी के गोलोक गमन हो जाने के बाद गौड़ीय संत एवं ब्रजजनों ने सिर मुंडवा कर उनके पार्थिव शरीर के साथ सात कोसीय गिरिराज परिक्रमा लगाई। तभी से गुरु पूर्णिमा को मुड़िया पूर्णिमा के नाम से जाना जाने लगा। आज भी सनातन गोस्वामी के तिरोभाव महोत्सव पर गौड़ीय संत एवं भक्त सिर मुड़वा कर मानसी गंगा की परिक्रमा कर परंपरा का निर्वहन करते हैं।
24 जुलाई को सनातन गोस्वामी के अनुयाई संत श्रीराधा श्याम सुंदर मंदिर चकलेश्वर गोवर्धन से 463वीं बार मुड़िया शोभा यात्रा भजन संकीर्तन के साथ निकालेंगे। मुड़िया पूर्णिमा के दिन 21 किमी परिक्रमा मार्ग में पांच दिनों तक अटूट मानव श्रृंखला मिनी विश्व का नजारा पेश करती आई है। लेकिन इस बार कोरोना के कारण मेला नहीं लगेगा। इस वर्ष 463वां मुड़िया महोत्सव मनाया जाएगा। अनुयायी मुड़िया संत रामकिशन दास ने बताया कि इस बार कोरोना के चलते प्रमुख संत मंदिर में एकत्र होकर सिर मुड़वाएंगे, उसके बाद मानसी गंगा में स्नान कर सनातन गोस्वामी के चित्र के साथ हरिनाम संकीर्तन करते हुए मानसीगंगा की परिक्रमा लगाएंगे।
आगरा में कोरोना: 455वीं मौत, तीन दिन बाद मिला एक नया पॉजिटिव, अब 56 सक्रिय मरीज