आगरा में अमर उजाला एमएसएमई काॅन्क्लेव का आयोजन किया गया। इसमें अतिथियों ने कहा कि जापान हो या जर्मनी ये सभी एमएसएमई की बदौलत विकसित हुए हैं। एमएसएमई आंदोलन का रूप ले रहा है। 2047 तक विकसित भारत में एमएसएमई का सबसे बड़ा योगदान होगा।
हमारा देश कभी सोने की चिड़िया था क्योंकि गांव-गांव सूक्ष्म व कुटीर उद्योग थे। दुनियाभर में निर्यात था, रुपये के बदले सोना मिलता था। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की बदौलत हम 11वें पायदान से विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गए हैं और इसी से दुनिया की नंबर वन अर्थव्यवस्था बनेंगे। ये बातें उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग ने कहीं। मौका था डॉ. बीआर आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क स्थित जुबली ऑडिटोरियम में आयोजित अमर उजाला एमएसएमई काॅन्क्लेव का। जहां एमएसएमई की मौजूदा चुनौतियों, संभावनाओं और वर्तमान स्थिति पर चर्चा की गई।
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उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा देश की खुशहाली और समृद्धि का रास्ता कृषि के साथ उद्योगों से होकर निकलता है। देश की आत्मा गांवों में रहती है। इसलिए गांव-गांव सरकार कौशल विकास और स्वरोजगार को प्रोत्साहन दे रही है। उन्होंने कहा कि 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में एमएसएमई का सबसे बड़ा योगदान होगा। केंद्रीय मंत्री प्रो. बघेल कहा, जब देश आजाद हुआ तब हम सूई तक नहीं बनाते थे, आज हम फाइटर प्लेन बना रहे हैं।
राज्यसभा सांसद नवीन जैन ने कहा, युवा, महिला, किसानों के उत्थान से ही भारत विकसित बनेगा। विवि की कुलपति आशुरानी ने छात्रों को कौशल विकास के लिए उद्योगों में प्रशिक्षण दिए जाने, उन्हें प्रोत्साहित करने की बात कही। फुटवियर एवं चर्म निर्यात परिषद के चेयरमैन पूरन डावर ने एमएसएमई के आंकड़े रखे। कहा, भारत में 6.44 करोड़ एमएसएमई पंजीकृत हैं। 27 करोड़ रोजगार दिए हैं। करीब 20% आबादी निर्भर है। विश्व निर्यात में 50% एमएसएमई की हिस्सेदारी है। जापान हो या जर्मनी ये सभी एमएसएमई की बदौलत विकसित हुए हैं। एमएसएमई आंदोलन का रूप ले रहा है। 2047 तक विकसित भारत में एमएसएमई का सबसे बड़ा योगदान होगा।
नौकरी ढूंढने वाले नहीं, देने वाले बनें
उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष राकेश गर्ग ने कहा कि कृषि के बाद उद्योग ही सबसे ज्यादा रोजगार का माध्यम है। युवाओं को नजरिया बदलना चाहिए। वह जॉब सीकर (नौकरी ढूंढने वाला) नहीं, बल्कि जॉब प्रोवाइडर (नौकरी देने वाला) बनें। उन्होंने कहा कि उद्योग व युवाओं के बीच समन्वय हो। उद्योग अपग्रेड हो रहे हैं। भू उपयोग सहित कई बाध्यता अब सूक्ष्म व लघु उद्योगों की स्थापना में खत्म हो गई है।
हमें अपनी बैकग्राउंड पर गर्व होना चाहिए। फिर चाहे वो खेती हो दर्जी या फिर नाई। हमें सोचना चाहिए कि नाई की दुकान को ब्यूटी पार्लर या सैलून में कैसे बदलें। दर्जी से फैशन डिजाइर कैसे बनें। मेरा परिवार विभाजन के समय आगरा आया। मलपुरा में रहा में शरणार्थी शिविर। उस समय लाहौर में एक भल्ले दी हट्टी (दुकान) थी, जहां जूता बिकता था। मैंने उससे प्रेरणा लेकर यहां जूता बेचना शुरू किया। मेहनत और लगन से आज मेरा करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार है।-पूरन डावर, अध्यक्ष, फुटवियर एवं चर्म निर्यात परिषद
चारों भाइयों ने 1982-83 में एलआईसी दफ्तर में कैंटीन चलाई। मेहनत और लगन से काम बढ़ा। फिर एक कंपनी बनाई। विजन था, इसलिए सफलता मिलती गई। आज बहुराष्ट्रीय कंपनी के मालिक हैं। ये कहानी है हमारी पीएनसी कंपनी की। उत्तर प्रदेश की टॉप-10 कंपनियों में शामिल रह चुकी पीएनसी का कारोबार आज देश ही नहीं दुनियाभर में फैला है। -नवीन जैन, राज्यसभा सांसद
मैं उत्तर प्रदेश पुलिस में सब इंस्पेक्टर था। 1992 में पुलिस की नौकरी छोड़ी। 1993 में प्रोफेसर बना। इसके बाद सिर्फ पांच साल एक महीने में 1998 में पहली बार जलेसर से सांसद बन गया था। 1998 के अलावा 1999, 2004 में लोकसभा सदस्य रहा। 2010 में राज्यसभा और 2019 और 2024 में पांचवीं बार लोकसभा पहुंचा। -प्रो. एसपी सिंह बघेल, केंद्रीय राज्यमंत्री