आगरा के इरादत नगर के गांव हल्की गढ़ी में मजदूर परिवार में शादी की खुशियां मातम में बदल गईं। शादी में आईं दूल्हे की बहन और बुआ की पंचकुइयां-तहसील मार्ग पर हादसे में मौत हो गई, जबकि जीजा घायल हो गया। तीनों बाइक पर थे। घटना से परिवार में कोहराम मच गया। एक तरफ बहू घर में विदा होकर आई, उधर बुआ और बहन की अर्थी उठी।
हल्की गढ़ी, इरादत नगर निवासी उमेश मजदूरी करते हैं। 18 अप्रैल को उनकी शादी थी। 14 अप्रैल को लग्न सगाई का कार्यक्रम गांव में हुआ था। इसमें उमेश की कुर्राचित्तरपुर निवासी बहन राधा (26) और बहनोई प्रदीप के अलावा ताजगंज के करभना निवासी बुआ शांति उर्फ कस्तूरी देवी (64) भी आई हुई थीं। बुधवार को अचानक राधा की तबीयत खराब हो गई।
इस पर उनको पति प्रदीप, बुआ शांति देवी खेरिया मोड़ स्थित एक चिकित्सक को दिखाने के लिए लाए थे। चिकित्सक को दिखाने के बाद जगदीशपुरा में रिश्तेदार के घर चले गए। दोपहर में 1 बजे तीनों बाइक से गांव लौट रहे थे। पंचकुइयां चौराहे से तहसील मार्ग पर आए तो पीछे से आ रहे ऑटो ने जोरदार टक्कर मार दी।
तीनों बाइक सहित सड़क पर गिर पड़े। चालक ऑटो लेकर भाग निकला। शांति देवी और राधा को गंभीर चोट लगी। प्रदीप भी घायल हो गए। राहगीरों की मदद से तीनों को एसएन मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान रात तकरीबन 3 बजे राधा की मौत हो गई। बृहस्पतिवार की शाम 4 बजे बुआ शांति देवी ने भी दम तोड़ दिया। दो मौतों से परिवार में कोहराम मच गया। शादी वाले घर में करुण क्रंदन गूंज उठा।
12 घंटे सीमा विवाद, मौका मुआयना के बाद मुकदमा
शांति देवी के बेटे राजकुमार ने बताया कि हादसे की जानकारी पर परिजन इमरजेंसी पहुंचे थे। जिस समय घटना हुई थी, उस समय तहसील चौराहे पर तैनात यातायात पुलिसकर्मी घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने ऑटो चालक को पकड़ऩे का प्रयास किया था। ऑटो को रोका नहीं जा सका। उधर, परिजन ने रात तकरीबन 12 बजे थाना शाहगंज में तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। बृहस्पतिवार को पुलिस मौके पर गई। पुलिस का कहना था कि घटनास्थल थाना नाई की मंडी क्षेत्र में है। वह थाना नाई की मंडी गए। तब पुलिस ने 12 घंटे बाद मुकदमा दर्ज किया।
इधर बहू आई, उधर बहन-बुआ की अर्थी उठी
बहन और बुआ की मौत से उमेश के परिवार में कोहराम मचा हुआ है। जिस समय मंगल गीत सुनाई देने चाहिए, उस समय करुण क्रंदन गूंज रहा था। बृहस्पतिवार को शादी की रस्में सादगी के साथ संपन्न कराई गईं। इसमें 10-12 परिजन ही शामिल हुए। बाकी लोग प्रदीप का इलाज करा रहे हैं। वहीं अन्य रिश्तेदार पोस्टमार्टम गृह पर रहे। शुक्रवार को बुआ और भतीजी के शवों का पोस्टमार्टम हुआ। इधर बहू को विदा कराकर उमेश घर लेकर आए, उधर उनकी बहन और बुआ की ससुराल में अर्थी उठी।