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मातृ दिवस 2022: एटा में पति और ससुर की हत्या के बाद महिला बनी तीन बच्चों का सहारा, अकेले के दम पर हासिल किया बड़ा मुकाम  

Sun, 08 May 2022 03:03 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

कहते हैं महिलाओं के अंदर वो शक्ति होती है, जो हर कठिनाई को आसानी से पार कर सकती है। फिर चाहे उसके साथ बड़ा कारवां हो या फिर अकेले ही क्यों न उसे जिम्मेदारियों का बोझ उठाना हो। मातृ दिवस पर ऐसी ही साहसी महिला की कहानी बताने जा रहे हैं, जिसका भरापूरा परिवार उजड़ गया, लेकिन अपने तीन बच्चों की खातिर वह दीवार बनकर खड़ी हो गई।
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अनीता यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के जिला एटा के मारहरा की रहने वाली अनीता के संघर्ष की ये कहानी है। घर में प्रधानी और ठीक-ठाक खेती, कुल मिलाकर जिंदगी बहुत आसान तरीके से आगे बढ़ रही थी, लेकिन अनीता की जिंदगी में एक आपराधिक वारदात ने भूचाल ला दिया। 14 साल पहले पति और ससुर दोनों की हत्या कर दी गई। इसके बाद जिंदगी बहुत बड़ी चुनौती बन गई। लेकिन विषम हालातों के आगे अनीता टूटी नहीं। खेतों पर काम किया और परिवार की खेवनहार बनी। तीन बच्चों की परवरिश कर उन्हें उच्च शिक्षा दिला रही हैं।
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विकासखंड क्षेत्र के गांव नौजरपुर निवासी अनीता देवी के पति कमलेश चंद्र और ससुर को 1 सितंबर 2008 को एटा-कासगंज मार्ग पर राजनीति कारणों के चलते कुछ लोगों ने दिनदहाडे मौत के घाट उतार दिया था, जिसके बाद अनीता देवी की खुशियां उजड़ गईं। पुत्र अभिषेक यादव (11), भानुप्रताप (7) और 2 बर्ष की बेटी के भविष्य संवारने की जिम्मेदारी अनीता देवी के कंधों पर आ गई थी। 

कमाई का कोई और जरिया नहीं था, पैतृक खेती को ही अपने हाथों में लिया और खेतों में जाकर मेहनत करने लगीं। शुरूआत में दिक्कत हुई, धीरे-धीरे सब संभलता गया। खेती ढर्रे पर आई और बच्चों की पढ़ाई भी अच्छी तरह होने लगी। अभिषेक स्नातक के बाद डीएलएड, टीईटी और सीटीईटी भी क्वालीफाई कर चुका है। तो छोटा बेटा भानुप्रताप कंप्यूटर साइंस से स्नातक करने के बाद व्यवसायिक कंप्यूटर कार्स कर चुका है। पुत्री की स्नातक की शिक्षा चल रही है।

साहस और संघर्ष का प्रतिदर्पण हैं हमारी मां

अभिषेक यादव कहते हैं कि हमारी मां असीम साहस और संघर्ष का प्रतिदर्पण हैं। पिता और बाबा की मृत्यु के बाद किसी को कुछ सूझ नहीं रहा था। उस समय मां ने परिस्थितियों से लड़ने का जज्बा दिखाया और हम तीनों भाई-बहन की ढाल बन गईं। गंभीर हालातों का सामना हंसते हुए कर उन्होंने हम तीनों को पढ़ाया-लिखाया। इतनी शिक्षा दिलाई कि जीवन की राह काफी आसान हो गई। 
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