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यूपी: जिस मां ने जन्म दिया, उसी की ले ली जान...व्हीलचेयर पर रहती थीं बृजेश देवी, फिर क्यों मार डाला

Mon, 12 Feb 2024 12:59 PM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला, न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

तरुण ने अपनी मां ब्रजेश देवी को आखिर क्यों मारा। वो तो हमेशा व्हीलचेयर पर रहती थीं। लोगों में इस बात की चर्चा हुई तो वे इस कृत्य पर तरुण को कोसते नजर आए। 
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Agra Suicide after murde - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आगरा की लॉयर्स कॉलोनी के रहने वाले तरुण ने अपने बेटे ही नहीं, बल्कि अपनी मां की भी हत्या कर दी। वह अपनी मां की भी जान ले लेगा, यह किसी ने सोचा नहीं था। खबर फैली तो आसपास के लोग आ गए। पहले तो हर कोई बेटे को कोस रहा था कि उसने मां की निर्ममता से हत्या क्यों कर दी। वह तो पहले से ही व्हीलचेयर पर थी। लेकिन, जैसे ही तरुण की भी मौत की जानकारी हुई तो लोगों की संवेदना जाग गई। वह घटना के कारणों और उसकी मजबूरी के बारे में चर्चा करने लगे।  
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सूचना पर पहुंची पुलिस ने परिजन से बात करके जानकारी जुटाई। परिजन ने बताया कि ब्रजेश देवी चौहान 10 वर्षों से बीमार रहती थीं। वह व्हीलचेयर पर थीं। पति मान सिंह चौहान जीवित थे तो उनकी देखभाल करते थे। उनकी मौत के बाद यह जिम्मेदारी बहू ने उठा ली थी। खाना खिलाने से लेकर नहलाने तक का काम बहू ही करती थी।

शनिवार को बहू रजनी घर से गई तो नौकरानी गीता को सुबह जल्दी घर आने के लिए कह गई। कहा कि आने के बाद मम्मी को देख लेना। अगले दिन गीता सुबह घर आई तो उसे दरवाजा खुला मिला। वह अंदर गई तो बृजेश का शव देखकर चीख पड़ी। बताया कि 19 मई 2023 को तरुण कार लाया था। उस समय मां से ही पूजन कराया था। इसका वीडियो बनाया और फेसबुक पर पोस्ट किया। पिता की फोटो रखकर पूजा की थी।
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बेटे की हर फरमाइश पूरी करता था

तरुण अपने बेटे कुशाग्र से बेइंतहा प्यार करता था। उसकी हर फरमाइश पूरी करता था। साइकिल से लेकर महंगी बाइक तक उसे खरीदकर दिला दी थी। कुशाग्र पढ़ने-लिखने में काफी होशियार था। वह रोजाना घर के बाहर दोस्तों के साथ क्रिकेट और बेडमिंटन खेलने जाया करता था। जब लोगों को उसकी मौत के बारे में पता चला तो यही कह रहे थे कि जिस बेटे से जान से ज्यादा प्यार, उसी की जान लेने में पिता के हाथ नहीं कांपे।

12 साल का कुशाग्र श्रीराम सेंटेनियल स्कूल में कक्षा 7 का छात्र था। फेसबुक पर बाइक पर बैठाकर बेटे का फोटो भी पोस्ट किया था। इस पर लिखा कि पुत्र के नाम। कुशाग्र को खाने में छोले भटूरे पसंद थे। जाने से पहले मां ने नौकरानी गीता को बताया था कि वह छोले पानी में भिगोकर जा रही हैं। रविवार सुबह आने पर बना देना। बेटे को खिला देना।
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