बटेश्वर मे मोहर छठ पर यमुना मे मोहर विसर्जन को जुटी महिलाओ युवतियों की भीड़ बटेश्वर के रानी घाट
बटेश्वर। उत्तर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थल में शुमार बटेश्वर धाम में मोहर छठ पर आस्था और उल्लास का संगम नजर आया। पर्व पर भारी संख्या में उमड़ी महिलाओं ने पति संग रानीघाट पर यमुना नदी में मोहर और मोहरी विसर्जन किए। सुखी दांपत्य जीवन की कामना के साथ मंगल गीत गाए।
सुबह से ही बटेश्वर तीर्थ क्षेत्र में उत्सवी माहौल देखने को मिला। महिला और युवतियों की टोलियां ढोलक की थाप, मंजीरों की खनक और पारंपरिक मंगल गीत गुनगुनाती हुईं यमुना घाटों की ओर बढ़ती नजर आईं। लोक मान्यता के अनुसार, विवाह के बाद मंडप के पवित्र प्रतीक मोहर और मोहरी को मोहर छठ के दिन नदी में विसर्जित करने से दांपत्य जीवन में खुशहाली आती है। विवाह से जुड़ी परंपरा का निर्वहन करते हुए वर और वधू दोनों पक्षों के परिजन ने यमुना के रानीघाट पर विधि-विधान से पूजन किया। श्रद्धालुओं ने सूप में पूड़ी, मीठे पकवान, विवाह के मंडप की लकड़ी, पटली, कंगन और मोहर-मोहरी को यमुना में प्रवाहित किया। मोहर-मोहरी विसर्जन का सिलसिला सुबह से देर शाम तक जारी रहा।
दाऊजी कुंड पर विसर्जित किए मोहर
पिनाहट के कस्बे में स्थित प्राचीन दाऊजी मंदिर के कुंड पर बुधवार को मोहर छठ के अवसर पर महिलाओं ने मोहर विसर्जन किया। ब्लॉक क्षेत्र के विभिन्न गांवों से महिलाएं दूल्हे की मोहर लेकर मंदिर परिसर पहुंचीं। कुंड में मोहर विसर्जित करने के बाद भगवान दाऊजी की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। बच्चों ने मेले में लगी दुकानों से खिलौने और अन्य सामान की खरीदारी की। स