इच्छा- पढ़ाई करूं, पैरों पर खड़ी हो सकूं
संघर्षों से हार नहीं मानने वाली किशोरी अब 15 साल की हो चुकी है। उसका कहना है कि वह पढ़ना चाहती है। पढ़ने का उसे बचपन से ही बहुत शौक था लेकिन परिस्थितियों ने पढ़ाई नहीं करने दी। अब इच्छा है कि मैं पढ़ाई करूं, अपने पैरों पर खड़ी हो सकूं।
कक्षा नौ में करा रहे प्रवेश
बाल अधिकार कार्यकर्ता नरेश पारस का कहना है कि किशोरी का कक्षा नौ में दाखिला कराया जा रहा है। उसकी पढ़ाई का खर्चा भी उठाया जाएगा। महिला कल्याण विभाग से प्रयास कर किशोरी को मुआवजा दिलाएंगे। परिवार आर्थिक रूप से काफी कमजोर है। दिल्ली से लाने के लिए ही पिता के पास पैसे नहीं थे। बड़ी मुश्किलों से एक हजार रुपये का इंतजाम कर किशोरी को दिल्ली से आगरा लाया जा सका था।