मथुरा के राया की श्रीनाथ धाम कॉलोनी निवासी एक किशोरी की सांस की बीमारी और फेफड़ों में संक्रमण के चलते बृहस्पतिवार को मौत हो गई, जबकि इसका हल्ला कोरोनावायरस से मौत का मच गया। किशोरी को बुधवार की रात रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम अस्पताल लाया गया था।
अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने उसे कोरोनावायरस का संदिग्ध मानते हुए दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। दिल्ली ले जाते समय रास्ते में ही उसकी मौत हो गई थी। हालांकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने बीमारी से मौत होने की बात कही है।
श्रीनाथ धाम कॉलोनी निवासी हिना (16) की कुछ दिन पहले तबियत खराब हुई थी। उसकी मां शमीम ने बताया कि स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद परिवार वालों ने उसको वृंदावन के रामकृष्ण मिशन अस्पताल में भर्ती कराया।
दिल्ली ले जाते वक्त रास्ते में तोड़ा दम
यहां डॉक्टरों ने कोरोना वायरस का संदिग्ध मरीज बताते हुए को दिल्ली रेफर कर दिया। बुधवार की रात दिल्ली ले जाते समय रास्ते में किशोरी की मौत हो गई। बृहस्पतिवार की सुबह परिवार वालों ने मोहल्ले के लोगों से कोरोना से मौत की चर्चा की तो हड़कंप मच गया।
इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी तुला राम ने जांच की तो पता चला कि किशोरी की मौत सांस की बीमारी और फेफड़ों में संक्रमण से हुई है। किशोरी अपनी मां के साथ सिलाई-बुनाई का काम करती थी।
सीएमओ शेर सिंह ने बताया कि किशोरी की मौत सांस की बीमारी और फेफड़ों में संक्रमण के चलते हुई है। रामकृष्ण मिशन अस्पताल ने किस जांच के आधार पर पर्चे पर कोरोनावायरस का संदिग्ध मरीज लिखकर दिल्ली रेफर कर दिया, इसका पता लगाया जा रहा है। किशोरी को इलाज के लिए जिला अस्पताल नहीं लाया गया था।
'कोरोनावायरस के मिल रहे थे लक्षण'
रामकृष्ण मिशन अस्पताल के डॉ चैतन्य गुप्ता ने बताया कि बीमार किशोरी को बुधवार की शाम को अस्पताल लाया गया था। किशोरी में कोरोना वायरस से संक्रमण के लक्षण दिख रहे थे। सर्दी से पीड़ित किशोरी को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी।
उसके फेफड़े सही काम नहीं कर रहे थे। इसलिए कोरोना का संदिग्ध केस मानते हुए दिल्ली एम्स के लिए रेफर किया था। चूंकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे मामलों को लेकर हमारे पास कोई निर्देश नहीं हैं। इसलिए किसी को सूचना नहीं दी।