समिति में पिता को अध्यक्ष, मां को प्रबंधक व सचिव, पत्नी को कोषाध्यक्ष, चाचा, चचेरे भाई, साले और रिश्तेदारों को पदाधिकारी एवं सदस्य बना दिया। वर्ष 2011-12 में समिति में पत्नी बेबी शर्मा के शपथ पत्र के माध्यम से कुछ पदाधिकारियों की मृत्यु दर्शा दी। इसके बाद चंद्रकांत शर्मा फर्जी नाम सुनील शर्मा से कोषाध्यक्ष बन गया। उसने अपनी मां उर्मिला को भी मृत दर्शा दिया, जबकि वो जिंदा हैं।
घोटाले की रकम से बनाई आय से अधिक संपत्ति
आरोप के मुताबिक, चंद्रकांत शर्मा ने समिति का प्रयोग सार्वजनिक रूप से करने के बजाय व्यक्तिगत लाभ के लिए किया। बेसिक शिक्षा विभाग, फिरोजाबाद के अधिकारियों से सांठगांठ कर ली। फिरोजाबाद के नगरीय क्षेत्र में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मिडडे मील वितरण का कार्य ले लिया। समिति का खाता पीएनबी में था। अधिकारियों से सांठगांठ करके चंद्रकांत शर्मा ने सुनील शर्मा बनकर खाते से वर्ष 2008 से मई 2014 तक 114648500 रुपये निकाल लिए।
मिड डे मील की रकम को आगरा की विभिन्न बैंक और डाकघर में सांठगांठ करके अपने, पत्नी और बच्चों के नाम से खाते खोलकर जमा करा दिए। घोटाले की रकम से ही आय से अधिक संपत्ति इकट्ठा कर ली। संपत्ति को बैंकों में गिरवीं रख दिया, जिससे उन्हें वैद्य दर्शा सके। इसके बाद अलग-अलग बैंकों से ऋण ले लिया। अचल संपत्ति खरीदी गई। उसने भूखंडों पर भवन का निर्माण कराया, लेकिन किसी विभाग से नक्शा पास नहीं कराया।