उत्तर प्रदेश के आगरा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद बुधवार को पहुंचे हैं। ग्रामीणों ने उनसे गुहार लगाई है। कहा कि साहब, आपको यमुना पुकार रही है। डूब क्षेत्र में निर्माण हो गए। पोइया घाट पर पुलिस, प्रशासन, सिंचाई व एडीए सब आंख मूंदे हुए हैं। यहां आएंगे तो आप खुद हकीकत जान जाएंगे।
बताते चलें कि सिकंदरा स्थित बाईंपुर से बल्केश्वर तक 10 किमी. लंबे यमुना डूब क्षेत्र में 500 से अधिक निर्माण खड़े हैं। नदी का डूब क्षेत्र 100 मीटर है। ताज संरक्षित वन क्षेत्र के मामले में सुनवाई के बाद एनजीटी ने डीएम को डूब क्षेत्र निर्धारण के निर्देश दिए थे।
सिंचाई विभाग ने डूब क्षेत्र चिह्नांकन के नाम पर खानापूर्ति की। आधी-अधूरी मुड्डियां लगाईं। दयालबाग के पोइया घाट पर डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को लेकर पुलिस, प्रशासन, सिंचाई और एडीए को मुंह की खानी पड़ी। छह माह बाद भी कब्जा नहीं हटा। यहां बुधवार को एनजीटी सदस्य निरीक्षण के लिए जा सकते हैं।
डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकना एडीए की जिम्मेदारी है। लेकिन, एडीए ही सबसे लापरवाह निकला। पूर्व में डूब क्षेत्र में एडीए ने अपार्टमेंट के नक्शे पास कर दिए। 2016 में एनजीटी में मामला पहुंचा। 2019 में एनजीटी के आदेश पर एडीए को डूब क्षेत्र में हुए निर्मण ध्वस्त करने पड़े।
कोरोना काल के बाद फिर अवैध निर्माण शुरू हो गए। एडीए अधिकारी आंख मूंदे रहे। पोइया घाट पर हुए अवैध निर्माण मामले में सिंचाई विभाग ने एडीए को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा, लेकिन नतीजा शून्य रहा।