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UP: आगरा पहुंचे एनजीटी की मुख्य बेंच के सदस्य, बोले- डूब क्षेत्र से हटने चाहिए निर्माण

Wed, 27 Mar 2024 03:28 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, आगरा

सार

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की मुख्य बेंच के सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद बुधवार को सर्किट हाउस में बैठक की। उन्होंने यमुना डूब क्षेत्र का निरीक्षण करने से इंकार कर दिया। 
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सर्किट हाउस में बैठक करते नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद - फोटो : संवाद
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश के आगरा में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल सदस्य न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद बुधवार को पहुंचे हैं। ग्रामीणों ने उनसे गुहार लगाई है। कहा कि साहब, आपको यमुना पुकार रही है। डूब क्षेत्र में निर्माण हो गए। पोइया घाट पर पुलिस, प्रशासन, सिंचाई व एडीए सब आंख मूंदे हुए हैं। यहां आएंगे तो आप खुद हकीकत जान जाएंगे। 

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न्यायमूर्ति ने सबसे पहले सर्किट हाउस में पर्यावरण संरक्षण कार्यों के संबध में उच्च अधिकारियों संग बैठक की। यमुना डूब क्षेत्र का निरीक्षण नहीं करने की बात कही। निरीक्षण न करने के सवाल पर उन्होंने व्यस्तता जाहिर की। लेकिन, उन्होंने कहा कि डूब क्षेत्र से निर्माण हटने चाहिए। 

उन्होंने कहा कि आगरा ऐतिहासिक शहर है। आने वाली पीढ़ियों तक पर्यावरण की साझा धरोहर को पहुंचाने के लक्ष्य को प्राप्त करेगा। कचरा प्रबंधन, नए जलाशय, कछुआ सरंक्षण व अन्य कार्यों को लेकर उन्होंने प्रशासन की सराहना की। 
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यमुना में गिरने वाले नालों को लेकर उन्होंने स्वीकार किया कि अभी 50% कार्य हुआ है। सभी नाले ट्रीट होकर नदी में नहीं गिर रहे। बैठक में डीएम भानु चंद्र गोस्वामी, सीडीओ प्रतिभा सिंह, डीएफओ आदर्श कुमार क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आदि मौजूद रहे।

चिह्नांकन के नाम पर खानापूर्ति 

बताते चलें कि सिकंदरा स्थित बाईंपुर से बल्केश्वर तक 10 किमी. लंबे यमुना डूब क्षेत्र में 500 से अधिक निर्माण खड़े हैं। नदी का डूब क्षेत्र 100 मीटर है। ताज संरक्षित वन क्षेत्र के मामले में सुनवाई के बाद एनजीटी ने डीएम को डूब क्षेत्र निर्धारण के निर्देश दिए थे। 

सिंचाई विभाग ने डूब क्षेत्र चिह्नांकन के नाम पर खानापूर्ति की। आधी-अधूरी मुड्डियां लगाईं। दयालबाग के पोइया घाट पर डूब क्षेत्र में हुए अवैध निर्माण को लेकर पुलिस, प्रशासन, सिंचाई और एडीए को मुंह की खानी पड़ी। छह माह बाद भी कब्जा नहीं हटा। यहां बुधवार को एनजीटी सदस्य निरीक्षण के लिए जा सकते हैं।

एडीए की सबसे बड़ी लापरवाही

डूब क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकना एडीए की जिम्मेदारी है। लेकिन, एडीए ही सबसे लापरवाह निकला। पूर्व में डूब क्षेत्र में एडीए ने अपार्टमेंट के नक्शे पास कर दिए। 2016 में एनजीटी में मामला पहुंचा। 2019 में एनजीटी के आदेश पर एडीए को डूब क्षेत्र में हुए निर्मण ध्वस्त करने पड़े। 

कोरोना काल के बाद फिर अवैध निर्माण शुरू हो गए। एडीए अधिकारी आंख मूंदे रहे। पोइया घाट पर हुए अवैध निर्माण मामले में सिंचाई विभाग ने एडीए को कार्रवाई के लिए पत्र लिखा, लेकिन नतीजा शून्य रहा।

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