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भाइयों से मिलीं तो भर आईं आंखें

Fri, 19 Aug 2016 04:43 PM IST
अमर उजाला आगरा
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राख्‍ाी - फोटो : अमर उजाला ब्‍यूूराो
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जेल में बंद भाइयों को रक्षाबंधन पर ‘रक्षासूत्र’ बांधने पहुंची बहनें भावुक हो गईं। उनके आंसू बहने लगे। सुबह से शाम तक बहनों की भाइयों से मिलाई कराई गई। जिला जेल में अव्यवस्थाएं भी फैल गईं। किसी को मिलाई की पर्ची के लिए भटकना पड़ा तो कोई अपनी बारी का घंटों इंतजार करती रही।
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जिला जेल में गुरुवार तड़के पांच बजे से ही महिलाओं का पहुंचना शुरू हो गया था। पुरुषों को प्रवेश नहीं था। घेवर के अलावा अन्य मिठाई नहीं ले जाने दी गई। 2260 बंदियों में से 1,300 बंदियों से मिलने तकरीबन दो हजार से ज्यादा बहनें आईं। उनके साथ 100 से अधिक बच्चे भी थे। छह शिफ्ट में उनकी मुलाकात कराई गईं। इसी तरह सेंट्रल जेल में 2,065 में से कुल 255 बंदियों से मिलने 345 बहनें आईं। उनके साथ 190 पुरुष और 70 बच्चे भी थे। सभी की चेकिंग के बाद ही दो शिफ्ट में मिलाई कराई गई।
‘जेल में बंद तीनों भाई, अब कोई नहीं है सहारा’
जलेसर, एटा की दो बहनें जब सेंट्रल जेल में बंद अपने तीन भाइयों से मिलीं तो उनके आंसू छलक आए। उनके तीनों भाई आनर किलिंग के मामले में सजा काट रहे हैं। पिता भी जेल में बंद हैं। वृद्ध होने के कारण हाल ही में उन्हें एटा जेल भेजा गया है। बहनों का कहना था कि पिछले आठ साल से घर संभालने वाला कोई नहीं है। पिता सरकारी विभाग में कार्यरत थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें सजा हुई। वहीं तीनों भाई शादीशुदा हैं। उनके बच्चे भी हैं। पैरवी करने वाला अब कोई नहीं बचा है। परिवार के 10 लोगों को सजा हो चुकी है।
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जेल में सिम ले जाने पर पकड़ा
सेंट्रल जेल में कुछ महिलाएं अपने पर्स में सिम रखकर ले आईं थी। चेकिंग के दौरान जेल प्रशासन ने सिम कब्जे में ले लिए। लौटते वक्त सिम वापस किए गए।
आज मिल सकेंगे भाई
जिला जेल में सौ से अधिक महिलाएं बंद हैं। जेलर ने बताया कि रक्षाबंधन पर बहनों को प्रवेश मिलता है। भाइयों को दूसरे दिन प्रवेश दिया जाता है। फिर भी महिला बंदियों को जेल में बंद उनके भाइयों और रिश्तेदारों से मिलने दिया गया।
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