फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम नहीं मिलने पर मजदूरी करना बना मजबूरी

विज्ञापन
विज्ञापन
मैनपुरी। पंजीकृत श्रमिकों को पंजीकरण कराने केे बाद भी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। पंजीकरण करा चुके श्रमिक काम नहीं मिलने पर मजदूरी करने को मजबूर हैं।
विज्ञापन

श्रमिकों केे लिए शासन ने कई लाभकारी योजनाएं संचालित की हैं। इन योजनाओं का लाभ उन श्रमिकों को ही मिलता है। जो श्रमिक श्रम कार्यालय में पंजीकृत होते हैं। पंजीकृत श्रमिकों को ही कुशल श्रमिक माना जाता है। देहात क्षेत्र में रहने वाले कई श्रमिकों ने श्रम कार्यालय में पंजीकरण तो कराया जाता है लेकिन वह योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाने से गांव से आकर शहर में मजदूरी करने को मजबूर हैं।
श्रमिकों ने पंजीकरण कराने केे बाद योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाने से मजदूरी करने को ही अपनी जीविका चलाने का आधार बना लिया है। शहरी क्षेत्र में सरकारी अथवा अर्घ सरकारी कंपनियां अथवा फैक्टरी नहीं होने से पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को योजनाओं का सही तरीके से लाभ तक नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन

पंजीकृत श्रमिक 42 हजार
जिले के श्रम प्रर्वतन कार्यालय में श्रमिकों का पंजीकरण किया जाता है। पंजीकृत श्रमिकों को ही सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता है। जिले में 42 हजार श्रमिक पंजीकृत हैं। जिनमें से लगभग एक तिहाई श्रमिकों को ही योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है।
योजनाओं की नहीं होती जानकारी
पंजीकृत श्रमिकों में महिलाएं और पुरुष दोनों ही तरह के श्रमिक शामिल हैं। पंजीकृत श्रमिकों के लिए चिकित्सा लाभ योजना, शिशु लाभ योजना, मातृत्व लाभ योजना जैसी कई योजनाएं संचालित हैं। अधिकांश पंजीकृत श्रमिकों को लाभकारी योजनाओं की जानकारी ही नहीं है।
पंजीकरण कराने के समय ही श्रमिकों को जानकारी दी जाती है। पंजीकृत श्रमिकों के लिए शिविर लगाकर उनको जागरूक करने के साथ ही संचालित योजनाओं का लाभ दिलाया जाता है। शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी होती है। - आरएम मिश्रा, श्रम प्रर्वतन अधिकारी
केस-एक
घिरोर के अनिल कुमार ने श्रम विभाग में वर्ष 2019 में पंजीकरण कराया है। अनिल कुमार का कहना है उनको किसी भी योजना का लाभ नहीं मिला है। पंजीकरण के बाद श्रम रोजगार नहीं मिल पाने के कारण मजदूरी करके परिवार का पेट पालना मजबूरी बन चुका है।
केस-दो
शहर के आगरा रोड निवासी राजबहादुर ने श्रम विभाग में वर्ष 2018 में पंजीकरण कराया है। पंजीकरण कराने के बाद भी राजबहादुर को श्रम विभाग की किसी योजना का लाभ नहीं मिल सका है। राजबहादुर का कहना है अगर श्रम रोजगार मिल जाए तो उनको मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें