आगरा में चुनावी मौके पर दल बदलने का जो सिलसिला शुरू हुआ, उसने सबसे ज्यादा झटके बसपा को दिए हैं। बसपा के दो-दो बार के विधायक रहे नेताओं और संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पदाधिकारियों ने भाजपा का दामन थामा तो बसपा को चुनावी चाणक्य याद आ गए।
बसपा में अब तक उपेक्षित और निष्कासित किए गए मिशनरी कार्यकर्ताओं को आगरा लोकसभा क्षेत्र में जुटाया गया है, वहीं निष्कासित नेताओं की भी वापसी की कवायद तेजी से की जा रही है।
बसपा ने संगठन के माहिर गोरेलाल को राजस्थान की जगह आगरा लोकसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी दी है। वो चुनाव के बीच में एक सप्ताह तक आगरा की चुनावी व्यवस्थाएं संभालेंगे। गोरेलाल लोकसभा प्रभारी के रूप में चुनाव कार्यालय से संचालन कर रहे हैं।
पूर्व विधायक भी टीम के साथ जुटे
वहीं पार्टी से निष्कासित किए गए पूर्व विधायक धर्म प्रकाश भारतीय भी पार्टी के लिए अपनी टीम लेकर जुट गए हैं। हालांकि, पार्टी ने उन्हें अभी कोई औपचारिक जिम्मेदारी नहीं सौंपी है और न ही पार्टी में वापसी की घोषणा की है, लेकिन वह पार्टी के लिए काम कर रहे हैं।
बसपा ने पूर्व में निष्कासित किए गए पूर्व जोनल को-आर्डिनेटरों से भी संपर्क किया है, हालांकि वह चुनाव परिणाम आने के बाद ही अगला कदम उठाने का इंतजार कर रहे हैं।
फतेहपुर सीकरी में भरपाई के लिए तलाश
बसपा को सबसे बड़ा झटका फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र में पार्टी के ही लोगों ने दिया है। फतेहपुर सीकरी से पूर्व विधायक ठा. सूरजपाल सिंह, खेरागढ़ से भगवान सिंह कुशवाह, फतेहाबाद से छोटे लाल वर्मा और प्रत्याशी रहे उमेश सैंथिया, बाह से पूर्व विधायक मधुसूदन शर्मा बसपा छोड़कर जा चुके हैं।
पूर्व में दयालबाग और एत्मादपुर से विधायक रहे डा. धर्मपाल सिंह भी अब बसपा छोड़ चुके हैं। वह मौजूदा आगरा ग्रामीण विधानसभा में खासा दखल रखते हैं। ऐसे में बसपा को फतेहपुर सीकरी लोकसभा की पांचों विधानसभा क्षेत्र में भरपाई के लिए ऐसे चेहरों की तलाश है जिनका अपना भी जनाधार हो।