फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पाक समर्थन में नारों से सुरक्षा एजेंसियां सकते में, सीआईएसएफ के सुरक्षा घेरे के बावजूद कैसे लगे नारे

Fri, 05 Apr 2019 09:21 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
चादर पोशी में कार्यक्रम में शामिल बच्चे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
ताजमहल में पाक  समर्थक नारे लगाए जाने की शर्मनाक घटना से सुरक्षा एजेंसियां सकते में आ गई हैं। सवाल उठ रहा है कि ताज के अंदर सीआईएसएफ का सुरक्षा घेरा होने के बावजूद नारे कैसे लग गए? इससे बड़ी चिंता की बात यह है कि इसकी जानकारी तुरंत ही सीआईएसएफ को क्यों नहीं हुई जबकि चप्पे चप्पे पर जवान तैनात हैं। अब हर पहलू पर जांच कराई जा रही है।
विज्ञापन


ताज की सुरक्षा में अंदर सीआईएसएफ रहती है। बाहर की जिम्मेदारी पुलिस के पास है। चप्पे चप्पे पर सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। इनका कंट्रोल रूम में निगरानी के लिए अलग से स्टाफ है। 

इतना सारा ताम झाम होने के बावजूद पाक समर्थित नारे लग गए और किसी को कुछ पता नहीं चला। इससे पहले कई बार ऐसा हो चुका है जब ताज के अंदर कभी रंग बिरंगे झंडे पहुंचे तो कभी किसी ने डांस किया। हर बार मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की गई।
विज्ञापन


फुलट्टी बाजार में दीवार पर लिखा मिला था, ‘आईएस कमिंग सून’
ताजमहल में पाक समर्थित नारा लगाया गया है। इससे पहले भी शहर में कई शर्मनाक वाकये पेश आ चुके हैं। अगस्त 2015 में कोतवाली के फुलट्टी स्थित घने बाजार में एक पुराने प्याऊ की दीवार पर ‘आईएस कमिंग सून’  दो बार लिखा गया था। 
 
विज्ञापन

किसी ने कोयले से इसे लिखा था। दुनिया के सबसे खूंखार आतंकी संगठन आईएस का नाम लिखा देख दुकानदार खौफ में आ गए थे। इस मामले में पुलिस से शिकायत की थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच की थी। मगर, इसे लिखने वाले का पता नहीं चल सका था।

आईएसआई कमांडर के नाम से आए थे खत
आगरा। सितंबर 2016 में आगरा कैंट रेलवे स्टेशन स्थित दुर्घटना राहत कार्यालय में धमकी भरे पत्र भेजे गए थे। आईएसआई कमांडर मोहम्मद मिर्जा के नाम से भेजे गए पत्र में सदर बाजार और जनकपुरी में धमाके की धमकी दी गई थी।

इसमें जय हास्पिटल में हुए बम धमाके का जिक्र था। पत्र जिससे भेजा गया, उसके लिफाफे पर कोड एमएम 00 एक्स, पाक भारत लिखा था। सदर बाजार के एक ज्वैलर्स का नाम भी था। कोड में लिखी शब्दावली को डिकोड करने के प्रयास भी किए गए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें