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मेरी पहचान मेरी लाडलीः पापा का सपना पूरा करने को कुश्ती के अखाड़े में कूद गईं बेटियां

Thu, 18 Jan 2018 11:21 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला मथुरा
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भावना और सपना माता-प‌िता के साथ - फोटो : अमर उजाला
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फिल्म ‘दंगल’ तो आपको याद होगी ही। किस तरह एक पिता अपनी बेटियों को पहलवान बनाने का सपना देखता है और बेटियां भी विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए अखाड़े में कूद जाती हैं। 
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मथुरा में लाजपत नगर निवासी भावना राजपूत और सपना की कहानी भी बिल्कुल ऐसी ही है। यह दोनों बहनें भी पिता का सपना पूरा करने को ‘दंगल’ गर्ल बन गई हैं। आज दोनों बहनें कुश्ती में राज्य स्तर पर नाम कमा रही हैं। 

भावना राजपूत ने बताया कि पहले वह जूडो खेलती थीं। पिता हाकिम सिंह का सपना था कि बेटियां पहलवानी में अपना नाम रोशन करें। फिर उनका रुख पहलवानी की ओर हो गया। 
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भावना ने राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में तीन गोल्ड, एक कांस्य, आगरा यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में दो गोल्ड, सीनियर स्टेट में खिताब के साथ ही ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी में तीन बार प्रतिभाग किया, नेहरू युवा केंद्र में बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर का खिताब जीता है। 

उनकी बहन सपना भी कुश्ती में अपनी प्रतिभा से सभी को चौंका रही है। सपना ने राजस्थान में कैडेट चैंपियनशिप में एक गोल्ड, दो सिल्वर, जूनियर स्टेट में एक गोल्ड, एक सिल्वर, एक कांस्य पदक राज्य प्रतियोगिता में जीता है। पिता हाकिम सिंह और मां उर्मिला को अपनी बेटियों पर नाज है।
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