मथुरा में सरकारी मशीनरी ने सर्दी के सीजन में निराश्रितों की देखभाल, ठंड से किसी की मौत न होने का दावा किया था। मगर, दावा फेल नजर आया। लाखों रुपये के कंबल वितरित करने, जगह-जगह रैन बसेरे बनाने के बाद भी इस सीजन में दस के करीब लोगों की मौत शहर से लेकर देहात तक हो चुकी हैं। आगरा-दिल्ली हाईवे स्थित रिफाइनरी पुल के नीचे एक निराश्रित साधू की मौत हो गई। पुलिस ने पंचायतनामे में ठंड से मौत होने की आशंका जाहिर की है।
रिफाइनरी थाना पुलिस द्वारा भरे गए पंचायतनामे में उल्लेख किया गया है कि 27 जनवरी की शाम राकेश पुत्र सत्यभान सिंह द्वारा पुलिस को सूचना दी गई कि रिफाइनरी पुल के नीचे एक वृद्ध मृत अवस्था में पड़ा है। पुलिस ने मौके पर पहुंच शव कब्जे में लिया। आसपास के लोगों से शिनाख्त के प्रयास किए। मगर, कोई पहचान नहीं हो सकी। आसपास के लोगों ने सिर्फ इतना बताया कि कुछ समय से निराश्रित पुल के नीचे सोता देखा गया। ठंड के कारण मृत्यु होने की आशंका पुलिस ने जाहिर की। शव की शिनाख्त न होने पर बुधवार को शव का अज्ञात में पोस्टमार्टम करने के बाद शव का दाह संस्कार कराया गया।
64 लाख रुपये के कंबल दो चरणों में खरीदे गए
सर्दियों में गरीबों-असहायों को कंबल बांटने व रैन बसेरों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था के लिए शासन से जिले को इस बार भरपूर बजट मिला था। प्रथम चरण में 25 लाख रुपये के बजट से 5376 कंबल खरीदे गए। वहीं, शासन से 50 हजार रुपये प्रति तहसील के हिसाब से अलाव का बजट भी जारी किया था। इसके बाद दूसरे चरण में शासन ने 8500 के करीब कंबल खरीदने के लिए 39 लाख रुपये का बजट दिया था। शासन से निर्देश था कि किसी भी सूरत में सर्दी लगने से जिले में किसी की मौत का कोई प्रकरण सामने नहीं आना चाहिए। नगर निगम और तहसीलों के जितने भी रैन बसेरे हैं, उनको दुरुस्त किया जाए। स्थायी रैन बसेरों में पूरे इंतजाम कर लिए जाएं। बस अड्डों व रेलवे स्टेशनों के पास रैन बसेरों की अस्थाई तौर पर व्यवस्था की जाए।