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जज्बा : सख्त पर्यावरण प्रेम ने बनाया 'हरित ऋषि'

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कासगंज। छोटा कद और बदन पर हरे कपड़े यहां तक कि पेन भी हरा यह हुलिया है पर्यावरण प्रेमी विजयपाल सिंह बघेल का। मूलरूप से वह हाथरस जिले के रहने वाले हैं, लेकिन उन्होंने अब कासगंज में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए मुहिम छेड़ दी है। वे पौधे रोपित करने पर तो बल दे ही रहे हैं, लेकिन उससे अधिक जोर पेड़ों के कटान को रोकने का है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग के सहयोग से यह पर्यावरण प्रेमी पूरे जिले में अब तक 25 हजार पौधे स्वयं के श्रोतों से लोगों तक पहुंचा चुके हैं। इसलिए वह ग्रीन मेन और हरित ऋषि के नाम से भी जाने जाते हैं।
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विजयपाल बघेल को बचपन से ही पर्यावरण से प्रेम था। लंबे समय से वह पर्यावरण संरक्षण की मुहिम छेड़े हुए हैं, लेकिन अब जब ऑक्सीजन का संकट बढ़ रहा है। ऐसे में उद्देश्य तय किया है कि हर हाल में पर्यावरण को संरक्षित करेंगे। अब तक वह फल, फूल और औषधि के पौधे लोगों तक पहुंचा रहे थे, लेकिन संकट के इस दौर में ऐसे पौधे घर-घर तक पहुंचाने का संकल्प लिया है जो अधिक ऑक्सीजन देते हैं। इन पौधों में नीम और पीपल के पौधे शामिल हैं। पिछले एक माह में उन्होंने कासगंज जिले में मुहिम छेड़ी है वह धीरे-धीरे कारगर हो रही है। अब तक 25 हजार पौधे जिले के लोगों के तक वह पहुंचा चुके हैं। अब वह 15 दिन तक जिले में रहकर घर-घर पौधरोपण का संदेश देकर लोगों को जागरूक करेंगे।
पेड़ को रोते देख ले ली थी प्रेरणा
विजयपाल बघेल कहते हैं कि बचपन में उन्होंने देखा कि गांव में एक गूलर का पेड़ काटा जा रहा है। उससे पानी निकलते देख दादा से पूछा कि पानी क्यों निकल रहा है। तो दादा ने कहा कि दर्द से पेड़ रो रहा है। इसके अलावा एक बार गायत्री परिवार के आचार्य पं. श्रीराम शर्मा से मुलाकात हुई तो उन्होंने भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया। वहीं से प्रेरणा लेकर हरियाली को संरक्षित करने की मुहिम छेड़ दी।
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विजयपाल बघेल पर्यावरण प्रेमी हैं। जब मैं गाजियाबाद जिले में तैनात था तब उनकी मुहिम वहां तेजी से चल रही थी। उनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण का है। अब वह निरंतर मुझसे संपर्क में रहकर कासगंज जिले में पर्यावरण संरक्षण की कोशिशों में जुटे हैं। - दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।
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